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Azamgarh News: महारानी दुर्गावती से प्रेरणा ले महिलाएं

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आजमगढ़। अखिल भारतवर्षीय गोंड महासभा की ओर से सोमवार को सिधारी स्थित कार्यालय पर महारानी दुर्गावती का बलिदान दिवस मनाया गया। वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं को उनके जीवन से प्रेरणा लेने की जरूरत है।
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इस माैके पर भगवान प्रसाद गोंड ने कहा कि महारानी दुर्गावती स्वाभिमान की जीती जागती प्रतिमूर्ति थी। मुगल शासक अकबर के शासन काल में देश के अधिकांश राजा उनकी अधीनता स्वीकार कर रहे थे, लेकिन वह अधीनता स्वीकार न कर गोंडवाना साम्राज्य की रक्षा करते हुए 24 जून 1564 को शहीद हो गईं। संचालन पतरू गोंड ने किया। इस मौके पर प्रेमचंद, राजीव कुमार, अनिल मनोज, ओमप्रकाश, संतोष आदि मौजूद थे।

शहर के चकला पहाड़पुर में कामरेड कतवारू गोंड के आवास पर महारानी दुर्गावती का बलिदान दिवस मनाया गया। डॉ. ज्योति सिंह ने कहा कि रानी दुर्गावती का जीवन संघर्षों से भरा था। आज की महिलाओं को उनके जीवन से प्रेरणा लेने की जरूरत है। महिलाएं अबला नहीं हमेशा सबल रही हैं। रानी दुर्गावती जुल्म के आगे कभी झुकी नहीं। अपने राज्य की स्वतंत्रता और अस्मिता के लिए उन्होंने युद्ध को चुना और 24 जून को वीरगति को प्राप्त हो गई। उन्होंने मुगल बादशाह हुमायूं को राखी भेजकर अपना भाई भी बनाया था। मुगल बादशाह ने राखी को स्वीकार करते हुए उन्हें ढेर सारा उपहार भी दिया था। अध्यक्षता पूर्व प्रधानाचार्य कल्पनाथ सिंह ने की। इस मौके पर कैलाश प्रसाद गोंड, नामी चिरैयाकोटी, मालती मिश्रा, शहजाद कुरैशी, सुनीता विश्वकर्मा, कामनी गुप्ता, मुन्नू यादव आदि मौजूद थे।
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