लाटघाट। जिले में घटने के बाद घाघरा नदी के जलस्तर में एक बार फिर से 20 से 22 सेमी की बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है। यह बढ़ोत्तरी नदी में छोड़े गए 317335 क्यूसेक पानी के कारण हो रही है। घाघरा नदी का जलस्तर गुजिया नाले पर खतरा निशान से एक सेमी नीचे बह रहा है। बदरहुंआ पर नदी खतरा बिंदु से 68 सेंमी नीचे बह रही है। घाघरा नदी 24 घंटे में बदरहुंआ पर 22 सेमी तो डिघिया पर भी 20 सेमी बढ़ी है। बदरहुवा गेज पर घाघरा नदी का न्यूनतम जलस्तर 70.26 मीटर, खतरा बिंदू 71.68 मीटर और अधिकतम जलस्तर 72.98 मीटर है। शुक्रवार को बदरहुंआ गेज पर नदी का जलस्तर 71.78 मीटर दर्ज किया गया था। जो शनिवार को 22 सेमी बढ़कर 71.00 मीटर हो गया। वहीं डिघिया नाले पर नदी का न्यूनतम जलस्तर 68.90 मीटर, खतरा बिंदु 70.40 मीटर और अधिकतम जलस्तर 72.10 मीटर है। डिघिया नाले पर शुक्रवार को जलस्तर 70.19 मीटर था जो शनिवार को 20 सेमी बढ़कर 70.39 मीटर हो गया। घाघरा नदी का अगले दो दिन तक जल स्तर बढ़ने की उम्मीद है। 317335 क्यूसेक पानी आ रहा है । गिरजा बैराज से 155103 क्यूसेक, शारदा बैराज से 160996 क्यूसेक और सरयू से 1236 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा हे। घाघरा नदी का जलस्तर घटने बढ़ने से तटवर्ती गांव में लोगों के अंदर कटान और बाढ़ का डर सताने लगा है। घाघरा नदी लगातार उर्दिहा, देवारा खास और परसिया, सहबदिया में कटान तेज कर दी है। घाघरा नदी लगातार कटान करती जा रही है। लेकिन तहसील प्रशासन और जिला प्रशासन इससे अनभिज्ञता जाहिर कर रही है और कृषि योग्य भूमि किसानों की कट रही है। उसकी चिंता नहीं है। उर्दिहा गांव के ग्राम प्रधान चंद्रिका पटेल ने बताया कि इसके संबंध में स्थानीय लेखपाल और तहसील को सूचना दिया और अभी तक इसका मूल्यांकन करने नहीं आए तो यही हालत परसिया गांगेपुर और सहबदिया का है जहां प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।