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लगातार बढ़ रहा घाघरा का जलस्तर, किसान परेशान

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लाटघाट। देवारा क्षेत्र में घाघरा नदी का कटान जारी है। जिसके कारण किसानों की कृषि योग्य भूमि नदी में समाती चली जा रही है। रविवार को डिघिया व बदरहुआ में नदी के जलस्तर में 2-2 सेटीमीटर की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। घाघरा नदी के जलस्तर में बढ़ोत्तरी के साथ ही कटान होने से किसान काफी चिंचित हैं। उनकी कई बीघा जमीन नदी में बिलीन हो गई। जलस्तर में बढोत्तरी के साथ ही नदी की कटान निरंतर जारी है। उर्दिहा गांव के किसानों की 150 बीघा जमीन को काटकर अपने आगोश में ले चुकी है। घाघरा नदी का जलस्तर धीमी गति से बढ़ रहा है। उर्दिहा गांव में जहां नदी ने कटान तेज कर दी है, वहीं परसिया और सहबदिया में कटान होने से किसान भूमिहीन होते जा रहे हैं। उर्दिहा गांव में कटान होने से शवदाह गृह का नदी में समा गया। गांव के ही रामबदन, राम लखन, गुलाइची, फूलमती, कलंदर, ओमप्रकाश, निर्मला, नर्सिंग, उमेश, सुरेश, मनोज आदि किसानों की लगभग 150 बीघा जमीन घाघरा में विलीन हो चुकी है। घाघरा नदी का 24 घंटे में बदरहुंआ और डिघिया में 2-2 सेमी बढ़ाव दर्ज किया गया। बदरहुंआ गेज पर घाघरा नदी का न्यूनतम जलस्तर 70.26 मीटर, खतरा बिंदू 71.68 मीटर और अधिकतम जलस्तर 72.98 मीटर है। शनिवार को बदरहुंआ गेज पर नदी का जलस्तर 70.40 मीटर दर्ज किया गया था। जो रविवार को 02 सेमी बढ़कर 70.42 मीटर हो गया। वहीं डिघिया नाले पर नदी का न्यूनतम जलस्तर 68.90 मीटर, खतरा बिंदु 70.40 मीटर और अधिकतम जलस्तर 72.10 मीटर है। डिघिया नाले पर शनिवार को जलस्तर 69.80 मीटर था जो रविवार को 02 सेमी बढ़कर 69.82 मीटर पर रहा। घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती गांव में कटान से किसान भूमिहीन होते जा रहे हैं, जिससे किसान सहमे हुए हैं। उर्दिहा गांव में कटान से जहां किसान परेशान हैं वहीं सहबदिया और परसिया गांव के किसानों की धड़कनें बढ़ती जा रही हैं। किसानों का कहना है कि हमारी कटी हुई जमीन का मुआवजा देने के लिए अभी तक राजस्व कर्मी भी गांव में नहीं पहुंचे हैं
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