आजमगढ़। जिलाधिकारी विशाल भारद्वाज ने गत बृहस्पतिवार को विकास खंड पल्हनी के चंडेश्वर व जहानागंज के ग्राम पंचायत करउत एवं शाहपुर में बन रहे अमृत सरोवरों का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान अमृत सरोवरों के निर्माण में कई अनियमितताएं मिलीं। जिसे लेकर दो ग्राम विकास अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही उन्हें अन्य ब्लाक पर संबद्घ करते हुए अंतिम जांच के लिए जांच अधिकारी नियुक्त किया है। जानकारी मुताबिक डीएम के निरीक्षण के दौरान करउत गांव में निर्माणाधीन अमृत सरोवर के लिए निर्गत मस्टररोल पर अंकित 51 श्रमिकों में से कोई भी श्रमिक काम करते हुए नहीं मिला, ना ही सचिव ने श्रमिकों के कार्य करते हुए कोई फोटोग्राफ प्रस्तुत की गई। जिससे कार्य पर लगाए गए श्रमिकों की पुष्टि नहीं हो पाई। मामले में पाया गया कि सचिव ग्राम प्रचायत एवं संबंधित तकनीकी सहायक व ग्राम रोजगार सेवक अपने पदीय दायित्वों के अधीन मनरेगा योजना के दिशा निर्देशों का पालन न करते हुए मनमाने ढ़ंग से अमृत सरोवर निर्माण में घोर लापरवाही बरते जाने का तथ्य मिला। दोषी मिलने पर ग्राम विकास अधिकारी अनिल कुमार पटेल को जिला विकास अधिकारी संजय कुमार सिंह द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। साथ ही निलंबन अवधि में अनिल कुमार पटेल को विकास खंड तहबरपुर से संबद्घ करते हुए प्रकरण की अंतिम जांच के लिए श्वेतांक सिंह खंड विकास अधिकारी बिलरियागंज को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। वहीं विकास खंड पल्हनी के चंडेश्वर ग्राम पंचायत में निर्माणाधीन अमृत सरोवर का निरीक्षण किया। जहां जारी मस्टररोल में अंकित 19 श्रमिकों के सापेक्ष मात्र सात श्रमिक कार्य करते हुए पाए गए। इतना ही नहीं निर्माणाधीन सरोवर की पैमाईश नहीं कराए जाने, मनरेगा योजना के दिशा-निर्देश के अनुसार कार्य प्रारंभ से पूर्व के नोटकैम फोटोग्राफ, डीपीआर प्रस्तुत नहीं किया गया। सावन सोनकर ग्राम पंचायत अधिकारी जानबूझकर अनुपस्थित रहे। दोषी पाए गए सावन सोनकर को जिला पंचायत राज अधिकारी द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबित अवधि में सावन सोनकर को विकास खंड मेंहनगर से संबद्घ करते हए प्रकरण की अंतिम जांच करने के लिए रेखा मौर्या अपर जिला पंचायत राज अधिकारी तकनीकी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।