रवि किशन के साथ रामसूरत राजभर
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इसके बाद 1999 में वह आजमगढ़ सदर संसदीय सीट से भाजपा के प्रत्याशी बनाए गए। जिसमें उन्हें एक लाख 72 हजार 878 वोट मिले थे। किसी बीजेपी प्रत्याशी के रूप में इस सीट पर रमाकांत यादव और दिनेश लाल यादव निरहुआ ही इतना वोट हासिल कर सके हैं। इसके बाद और 2007 में भी उन्होंने फूलपुर विधानसभा से चुनाव लड़ा। 2017 में जब बीजेपी ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो वह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में कूद पड़े। हालांकि इन चुनावों में उन्हें जीत हासिल नहीं हुई।
2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने एक बार फिर उन पर विश्वास जताते हुए प्रत्याशी बनाया। हालांकि वह चुनाव हार गए लेकिन उन्होंने पार्टी को मजबूती प्रदान की। अब पार्टी ने उन पर विश्वास जताते हुए उन्हें विधान परिषद सदस्य मनोनीत बनाया है। जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में हर्ष व्याप्त है।
यूपी में भाजपा की तरफ से विधान परिषद सदस्य मनोनीत करने के लिए नाम भेज दिए गए हैं। शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सहमति के बाद नाम राजभवन भेज दिए गए हैं। इसके तहत लालजी निर्मल, साकेत मिश्रा, हंसराज विश्वकर्मा, रजनीकांत माहेश्वरी, तारिक मंसूरी और रामसूरत राजभर को विधान परिषद का सदस्य मनोनीत किया जाएगा।