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आज डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगी व्रती महिलाएं

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शहर के फराश टोला क्षेत्र से छठ पूजा के लिए कोसी की खरिदारी करती महिलाएं। - फोटो : AZAMGARH
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आजमगढ़। चार दिनों तक चलने वाले आस्था के महापर्व छठ पूजा की शुरुआत नहाय-खाय के साथ सोमवार से हो गई है। मंगलवार को खरना में नैवेद्य बनाया गया। बुधवार को व्रती डूबते सूर्य को पहला अर्घ्य देंगी। बृहस्पतिवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करेंगी। आस्था की इस राह में टूटी सड़कें और घाटों पर जमा कीचड़ आस्थावानों की परीक्षा लेगा। छठ पर्व पर महिलाओं के साथ-साथ पुरुष भी यह व्रत रखते हैं। दूसरे दिन शाम को खरना ग्रहण करने के बाद व्रती निर्जल व्रत की शुरुआत करते हैं। छठ के तीसरे दिन शाम के वक्त डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही विशेष प्रकार का पकवान %ठेकुवा%और मौसमी फल चढ़ाए जाते हैं। पर्व के मौके पर बाजार में सूप, डलिया, दीया, नई साड़ियों आदि की खरीदारी तेज हो गई। नगरपालिका एवं नगर पंचायत क्षेत्र में पड़ने वाले सभी नदियों के घाटों की सफाई करने के साथ वहां रोशनी का इंतजाम कर रहे हैं। सबसे खराब हालत कदम घाट पर देखने को मिली। इस घाट पर आने वाले आस्थावानों को कड़ी परीक्षा से गुजरना पड़ सकता है। क्योंकि नदी का जलस्तर देर से कम होने के कारण घाट पर पूरी तरह से कीचड़ जमा है। वहीं रास्ते पर बह रहे नाले पर अभी आवागमन की व्यवस्था प्रशासन की ओर से नहीं की गई है। जिसके इंतजाम में पूरे दिन पूजा समिति के लोग जुटे हुए थे। नाले पर चह बनाकर उस पर आवागमन की व्यवस्था की जा रही थी। वहीं कीचड़ के उपर चहली रख आवागमन की व्यवस्था सुदृढ़ की जा रही थी। पूजा समिति के अध्यक्ष बृज लाल सोनकर ने बताया कि इस बार प्रशासन और नगरपालिका की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गई है। घाटो की गंदगी हमें साफ करनी पड़ रही है। दूसरे के घर से कनेक्शन जोड़कर प्रकाश की व्यवस्था करनी पड़ रही है। वहीं नगर के पुरानी कोतवाली से दलालघाट, बदरका से पुरानी सब्जी मंडी आदि रास्तों के जरिए पूजन करने जाने वालों को कठनाई का सामना भी करना पडे़गा।
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