आजमगढ़। आग से निपटने के लिए जिले के अस्पताल, मैरिज हॉल और होटलों में कोई व्यवस्था नहीं है। फायर विभाग से बिना एनओसी लिए यह प्रतिष्ठान धड़ल्ले से संचालित किए जा रहे हैं। इनमें से तो कई मैरिज हॉल, अस्पताल ऐसे हैं जो घनी आबादी में हैं।
शहर में ही देखा जाय तो यहां डेढ़ दर्जन से अधिक मैरिज हॉल हैं। इसके अलावा बड़े पैमाने पर होटल और अस्पताल संचालित किए जा रहे हैं। इन सभी प्रतिष्ठानों में आग से बचाव के समुचित व्यवस्था के साथ ही फायर विभाग की एनओसी होनी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं है। शहर के दो-तीन बड़े होटलों को छोड़ दिया जाय तो किसी ने भी फायर विभाग ने एनओसी नहीं लिया है। इनके भवन में जो भी अग्नि शमन यंत्र लगे हुए है वह भी काफी पुराने होकर बंद पड़े हुए हैं। यहीं हाल निजी अस्पतालों का भी है। कुछेक बड़े अस्पतालों को छोड़ दिया जाय तो अन्य अस्पतालों में आग पर काबू पाने की कोई व्यवस्था नहीं है। सीढ़ी भी एक ही है। अस्पतालों में प्रतिदिन मरीज अपने तीमारदारों के साथ जान हथेली पर रखकर रहते हैं। किन्हीं कारणों से इन जगहों पर अगलगी की घटना होती है तो कइयों की जान जा सकती है।
यही हाल जिले की छोटे-बड़े कई मैरिज हालों का है। किसी भी मैरिज हॉल संचालक ने अभी तक फायर विभाग से एनओसी नहीं लिया है। जबकि शहर में ही करीब दो दर्जन मैरिज हॉल हैं। सहालग के समय इन मैरिज हॉलों में हर रोज सैकड़ों लोगों की भीड़ जुट रही है और आतिशबाजी भी हो रही है। सुविधा देने के नाम पर यह बुकिंग कराने वालों से अच्छी खासी रकम भी लेते हैं लेकिन इनके यहां सुरक्षा से सबंधित इंतजाम नहीं है। आग पर काबू पाने के लिए फायर सिस्टम नहीं लगे हुए हैं। विभाग भी इस पर अपनी आंखें मूंदे बैठा है। इतना ही नहीं इनके पास पार्किंग की व्यवस्था भी नहीं है। वाहन रोड के किनारे खड़े हो रहे हैं।
000
शहर के तीन-चार बड़े होटलों ने एनओसी लिया है। किसी मैरिज हॉल संचालक की तरफ से एनओसी के लिए आवेदन नहीं आया है। जब- जब ऊपर से आदेश आता है तो फायर विभाग की टीम जांच करने पहुंचती है। सभी को अपने प्रतिष्ठानों में नियमानुसार फायर सिस्टम लगाकर विभाग से एनओसी लेने का निर्देश दिया जाता है। - वीके शर्मा, सीएफओ।