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Azamgarh News: भयावह था मंजर, सड़क पर दूर-दूर बिखरे थे शव, फट गए थे कपड़े

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पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर शनिवार की रात हुए भीषण हादसे के बाद दुर्घटना स्थल का मंजर काफी भयावह था। बोलेरो जीप की छत ही नहीं, उसकी बॉडी भी पूरी तरह से गायब हो चुकी थी। मृतकों के शव सड़क पर जगह-जगह इधर-उधर पड़े हुए थे। यहां तक कि मृतकों के पहने हुए कपड़े भी फट गए थे।
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हादसे के बाद सबसे पहले मौके पर पहुंचने वालों में शामिल एसओ अहरौला योगेंद्र बहादुर सिंह ने रविवार की सुबह रात का हाल बयां करते हुए कहा कि मौके पर पहुंचते ही हाल देख कर जैसे रूह ही कांप गई। मृतकों के शव गाड़ी से छिटक कर दूर-दूर बिखरे पड़े थे और शवों की दशा ऐसी थी कि उनके पहने हुए कपड़े तक फट चुके थे। बोलेरो के परखच्चे ही उड़ गए थे। दुर्घटनाग्रस्त बोलेरो की बात की जाए तो आगे का हिस्सा छोड़ कर छत व पूरी बॉडी ही गायब हो चुकी थी। घटना के बाद आसपास के सभी थानों की पुलिस के साथ ही यूपी 112 की गाड़ियां व एंबुलेंस मौके पर पहुंच गई। इससे मृतकों के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजवाया गया। वहीं हादसे में जिंदा बची किरन को इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया।
फोन पर जल्द घर पहुंचने की दी थी जानकारी, आई मौत की सूचना
अहरौला/बलरामपुर। घटना की जानकारी होने पर मृतकों के परिजन व रिश्तेदार अहरौला थाना व पोस्टमार्टम हाऊस पर पहुंच गए। परिजनों के अनुसार घटना से कुछ ही देर पूर्व फोन पर जल्द घर पहुंचने की सूचना दी गई थी और रात में ही मौत की सूचना आ गई। परिजनों के अनुसार मृतक कैलाश इलेिक्ट्रशियन का काम करता था। वह अपनी पत्नी नीतू को इलाज के लिए लेकर लखनऊ गया था। इनके तीन पुत्र व एक पुत्री है। सभी नाबालिग हैं। वहीं मृतक अनिल दो पुत्र व दो पुत्रियों का पिता था। मृतका गुड्डी दो लड़का व सात लड़कियों की मां थी। वहीं हादसे में मृत रानी के दो भाई व दो बहन बताए गए हैं। बोलेरो में सवार सभी आपस में रिश्तेदार थे और दवा कराने के लिए लखनऊ कैलाश की बोलेरो से एक साथ गए थे।
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कहीं नियमों की अनदेखी तो नहीं पड़ गई भारी
अहरौला। पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर वाहन चलने के लिए तरह-तरह के नियम व दिशा-निर्देश हैं, जिसका अनुपालन कराना टोल प्लाजा के साथ ही यूपीडा की चक्रमण करने वाली टीम की है। हादसा बांस-बल्ली लदी ट्रैक्टर-ट्राली से हुआ है। नियमत: रात में कम स्पीड वाले वाहन पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर नहीं चलने चाहिए, इन्हें रेस्ट एरिया में रोक दिया जाना चाहिए, लेकिन रात्रि पूर्वांचल पर गश्त करने वाली यूपीडा की टीम ने ट्रैक्टर-ट्राली को नहीं रोका। यदि इसे नियमानुसार रात में चलने से रोक दिया गया होता तो शायद यह हादसा नहीं हुआ होता। सेहदा टोल प्लाजा के मैनेजर शिववीर सिंह ने बताया कि दिन में बांस-बल्ली ही क्या कोई भी सामान लेकर वाहन सुरक्षा तैयारियों के साथ गुजर सकते हैं। रात में कम स्पीड वाले वाहन जैसे ट्रैक्टर-ट्राली, बाइक आदि का रात में चलना प्रतिबंधित है। यूपीडा की चक्रमण करने वाली टीम को ट्रैक्टर-ट्राली को रात में रोक देना चाहिए था।
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