आजमगढ़। इस बार कम बारिश ने किसानों की चिंता को बढ़ा दिया। धीरे- धीरे समय निकलता जा रहा है जिसके कारण धान की रोपाई प्रभावित हो गई है। किसान किसी प्रकार से निजी संसाधनों के भरोसे धान की रोपाई करने को मजबूर है। पिछले साल की तुलना में करीब 20 मिमी. बरसात कम हुआ है। खेतों में नमी न होने के कारण खरीफ की अन्य फसलों की भी बुवाई किसान समय से नहीं कर पा रहे हैं। पांच साल में जुलाई माह में इस बार सबसे कम बारिश होने के कारण किसान चिंचित हैं। आषाढ़ माह में ही मानसून आ जाता हैं। श्रावण मास में अच्छी बारिश होने लगती है। जिससे किसान अपने खेतों में धान की रोपाई के साथ खरीफ की अन्य फसलों मक्का, अरहर, उड़द, ज्वार, बाजरा की बुवाई करने में जुट जाते है। हर बार की तरह किसानों ने सोचा था कि इस बार भी अच्छी बारिश होगी। इसे देखते हुए किसान समय से धान की नर्सरी डाल दिए थे। अब यह धान की नर्सरी तैयार हो चुकी है। किसान रोपाई के लिए आसमान में टकटकी लगाए बैठे है कि कब बारिश होगी। कभी कभार तो बरसात हो रही है लेकिन वह धान की रोपाई के लिए नाकाफी है। रोपाई न होने के कारण धान की नर्सरी भी खराब होने की कगार पर पहुंच चुकी है। इसके अलावा जो लोग अपने निजी संसाधनों से किसी प्रकार धान की रोपाई किए, उनकी भी धान की फसल पानी न मिलने से सुख रही है। विभाग की आकड़ों पर गौर किया जाए तो 15 जुलाई तक मात्र 5.75 मिमी. ही बारिश हुई। जिले में बृहस्पपिवार की शाम करीब एक घंटे तक अच्छी बरसात हुई लेकिन सुबह होते ही खेतों से पानी गायब थे। बारिश न होने के कारण खेतों में सुखे पड़े हुए हैं। समय से रोपाई न होने से धान की रोपाई प्रभावित हो रही है।
पिछले पांच वर्षो में हु्ई बरसात का आंकड़ा
माह/ वर्ष- - बरसात की स्थिति
जून 2018- 09.04 मिमी.
1से 15 जुलाई 2018- 29.93 मिमी.
जून 2019- 39.03 मिमी.
1से 15 जुलाई 2019- 322.42 मिमी.
जून- 2020- 140.06 मिमी.
1से 15 जुलाई 2020- 106.03 मिमी.
जून- 2021 199.03 मिमी.
1से 15 जुलाई 2021- 26.00 मिमी.
जून- 2022- 29.93 मिमी.
1से 15 जुलाई 2022- 05.25 मिमी.
जिला कृषि अधिकारी डॉ. गगनदीप सिंह ने कहा कि पूरे जुलाई माह धान की रोपाई होती है। इसलिए अभी यह नहीं कहा जा सकता है कि धान की रोपाई प्रभावित हो रही है। जिले में 95 प्रतिशत से अधिक क्षेत्रफल में धान की रोपाई होती है। अगर पूरे जुलाई में बरसात नहीं हुई तो धान की खेती प्रभावित हो जाएगी।