लालगंज। तहसील में बुधवार को बहन की पैरवी करने गए अधिवक्ता को कुछ लेखपालों ने कमरा बंद करके पीटा। शोर सुनकर अधिवक्ताओं की भीड़ लेखपाल कक्ष की तरफ दौड़ पड़ी। अधिवक्ताओं की भीड़ देखकर लेखपाल कमरे से भागने लगे एक लेखपाल दौड़कर तहसीलदार के विश्राम कक्ष में छिप गया। जिसे घेरकर अधिवक्ता धरने पर बैठ कर नारेबाजी करने लगे। सूचना मिलने पर सीओ लालगंज और देवगांव कोतवाली प्रभारी फोर्स के साथ पहुंच गए। जबकि एसडीएम और तहसीलदार पहले से मौजूद थे। नाराज वकील दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए अड़े हैं। देवगांव कोतवाली क्षेत्र के कोटा खुर्द गांव निवासी उषा देवी पत्नी मनोज कुमार ने बताया कि गांव में हमारे ससुर ने भूमि का बैनामा लिया था। जिसका नामांतरण नहीं हो पाया है। जिस पर वह काबिज हैं, उसी नंबर में कुछ हिस्सा पोखरी का भी है। उन्होंने बताया कि हल्का लेखपाल बराबर धमकी देता है कि फसल काट लो हम पोखरी खोदवाएंगे। उसने बुधवार को एसडीएम से पोखरी का चिन्हीकरण कर कारवाई करने का आदेश करा कर अपने भाई मंतराज के साथ लेखपाल को देने गयी थी। लेखपाल ने आवेदन देखते ही अपशब्दों की बौछार शुरू कर दी। हमारे भाई मंतराज एडवोकेट ने जब इसका विरोध किया तो कमरे में बैठे सभी लेखपाल दरवाजा बंद कर मेरे भाई को पीटने लगे। हम लोग शोर मचाने लगे तो लेखपाल लोग दरवाजा बंद कर भाग गए। हंगामा होते ही एसडीएम, तहसीलदार, सीओ, प्रभारी निरीक्षक देवगांव पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए। घायल अधिवक्ता को इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। वह अधिवक्ता दोषी लेखपालों के विरुद्ध मुकदमा लिखकर उनको निलंबित करने की मांग पर अड़े हुए थे। उपजिलाधिकारी लालगंज एसएन त्रिपाठी, तहसीलदार उमाशंकर त्रिपाठी, सीओ मनोज रघुवंशी एवं एसपी सिटी शैलेंद्र लाल ने अधिवक्ता विंध्यवासिनी राय, रामसेवक यादव, नागेंद्र सिंह आदि से बुलाकर वार्ता की और उन्होंने आश्वासन दिया कि तीनों लेखपालों को निलंबित कर दिया गया है। एक लेखपाल को तत्काल गिरफ्तार किया जाता है और इन तीनों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कर लिया जाएगा। इस पर अधिवक्ता शांत हुए। एसडीएम ने फ़हीम अहमद, आतिफ, नवीन दुबे लेखपाल को निलंबित किए जाने की बात कही।