आजमगढ़। ग्राम पंचायतों में मिनी सचिवालय के स्थापना का सपना मूर्तरूप नहीं ले पा रहा है। ग्रामीण आज भी ब्लाक व तहसील की दौड़ लगा रहे हैं। गांवों में बने पंचायत भवन शोपीस बनकर रह गए हैं। जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। जबकि शासन का सख्त निर्देश है कि बिना सचिवालय बने किसी भी ग्राम पंचायत में विकास कार्यों का भुगतान नहीं किया जाएगा। फिर भी इसका कोई असर नहीं देखने को मिल रहा है। जिले में 1858 ग्राम पंचायतें हैं। ग्रामीणों को आय, जाति प्रमाण पत्र और दूसरी सुविधाएं मुहैयार कराने के लिए गांवों में मिनी सचिवालय का निर्माण कराया जा रहा है। इसी भवन में पंचायत की बैठकें होनी हैं और ग्राम पंचायत अधिकारी भी बैठेंगे। पंचायत के दस्तावेजों के सुरक्षित रखरखाव, कंप्यूटर आदि की उपलब्धता रहेगी। इसके लिए सरकार लाखों रुपये खर्च करके गांव में सचिवालयों का निर्माण करा रही है लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के कारण अभी तक कई विकास खंडों के गांवों में मिनी सचिवालय नहीं बन सके हैं। जब इसकी पड़ताल की गई तो कई फरियादी तहसील पर मिले जो अपनी समस्या लेकर पहुंचे थे। उनका यही कहना था कि यदि मिनी सचिवालय बन जाते तो हमें यहां आने की जरूरत नहीं पड़ती है। चकिया दुबे रामपुर के शिव मूरत यादव ने कहा कि हमारी समस्याओं का समाधान आसानी से हो इसके लिए गांवों में मिनी सचिवालय बनाए जाने का आदेश है। आज हमे समस्या हुई तो यहां आना पड़ा। यदि गांव में मिनी सचिवालय होता तो यहां तक दौड़ नहीं लगानी पड़ती। वहीं गंधुवई के विजय ने बताया कि खेत की पैमाइश के लिए आज 15 दिन से तहसील का चक्कर काट रहे हैं। यदि मिनी सचिवालय गांव में बना होता तो अधिकारी वहीं मिल जाते। यहां तो प्रार्थना पत्र देने पर भी उनको कोई असर नहीं पड़ रहा है। पूरागांव के उमेश यादव ने कहा कि हमे लेखपाल से काम था। पिछले कई दिनों से यहां दौड़ रहा हूं। यदि मिनी सचिवालय होता तो हमे इतनी दूर नहीं आना पड़ता। क्षेत्रीय लेखपाल वहीं मिल जाते। हमारा काम बिना दौड़ लगाए ही आसानी से हो जाता। डीपीआरओ अजय श्रीवास्तव ने कहा कि सचिवालय का निर्माण कराया जा रहा है। इसके लिए ग्रामप्रधानों को भी निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही निर्माण पूर्ण कर लिया गया है। हालांकि सभी ग्राम पंचायतों से मिनी सचिवालयों की वर्तमान समय की स्थिति मांगी गई है।