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अपनी गर्दन बचाने के लिए जिला प्रशासन ने पत्रकारों को फंसाया

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अतरौलिया। बलिया में जिला प्रशासन द्वारा पत्रकारों के विरूद्घ की गई कार्रवाही के विरोध में शुक्रवार को ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन तहसील इकाई बूढ़नपुर ने बैठक कर रोष जताया। इसके बाद राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी को सौंप कर निर्दोष पत्रकारों को रिहा करने व दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों पर कार्रवाही करने की मांग किया। ज्ञातव्य हो कि बलिया जिले के पत्रकार अजीत ओझा, दिग्विजय सिंह व मनोज गुप्ता अपने सूत्रों से बोर्ड परीक्षा के दौरान समाचार संकलन कर नकल माफियाओं का भंडाफोड़ कर रहे थे। अपनी किरकिरी होता देख जिला प्रशासन ने शिक्षा माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई न करके उल्टे पत्रकारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा कर जेल भेज दिया। यह पत्रकारिता के स्वतंत्रता का हनन और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला है। मंडल उपाध्यक्ष रज्जाक अंसारी ने कहा कि जब लोकतन्त्र का चौथा स्तंभ सुरक्षित नहीं है तो आम आदमी कैसे सुरक्षित रहेगा। यह पत्रकारों को डराने धमकाने का पूरा प्रयास है। पत्रकार जब सच लिखता है तो अपने गर्दन को बचाने के लिए जिला प्रशासन उन पत्रकारों पर मुकदमा दर्ज कर देता है। मांग किया कि बलिया के पत्रकारों पर दर्ज फर्जी मुकदमें को वापस लिया आए और बिना शर्त उन्हें जेल से रिहा किया जाए। पत्रकारों को फर्जी मुकदमे में फंसाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इस अवसर पर जिलाध्यक्ष बृजभूषण उपाध्याय, प्रवीण सिंह, बीरभद्र प्रताप सिंह, दिनेश त्रिपाठी, संतोष कुमार मिश्रा, विवेक जायसवाल, सैयद शादाब अशरफ, अखिलेश चौबे, उपेंद्र पांडेय विवेक कुमार जयसवाल, अंगद सिंह, फूलचंद यादव, देवी प्रसाद वर्मा विवेक सिंह सहित काफी संख्या में पत्रकार उपस्थित रह्रे।
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