जनपद में छुट्टा पशु किसानों और राहगीरों के लिए समस्या बने हुए हैं। सड़क से लेकर खेतों तक इनकी धमाचौकड़ी मची है। गौशालाओं में गोवंश को सरंक्षण देकर किसानों को राहत देने के दावे धरातल पर झूठे नजर आ रहे हैं। आए दिन लोग इनके चक्कर में दुर्घटना का शिकार भी हो रहे हैं। ऐसे में जिम्मेदार मौन हैं।
सरकार की ओर से छुट्टा पशुओं को गोशालाओं में रखने का निर्देश दिया गया है। इनके सड़कों पर नजर आने पर कार्रवाई की चेतावनी भी है लेकिन शासन प्रशासन के सारे आदेश और निर्देश हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। शहर से लेकर गांव तक छुट्टा पशुओं को घूमते देखा जा सकता है। आलम यह है कि खेतों में पशु फसलों को तबाह कर रहे हैं। सड़क पर ऐसे पशु दुर्घटनाओं का सबब बन रहे हैं। फसल चौपट कर मवेशी किसानों को तगड़ी चोट दे रहे हैं, राहगीरों को घायल कर रहे हैं। इनसे राहगीर तथा किसान दोनों ही परेशान हैं। जिला प्रशासन की ओर से इसके लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है लेकिन उस पर फोन करने के बाद भी कुछ हासिल नहीं है।
शासन के निर्देश पर जनपद में दो स्थायी और 41 अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल बनाए गए हैं। इनमें नौ हजार से अधिक पशुओं को रखा गया है। इसके बाद भी सड़कों पर काफी संख्या में पशु टहलते देखे जाते हैं। कई गोवंश आश्रय स्थलों में क्षमता से अधिक पशु रखे गए हैं।
नगर के पहाड़पुर तिराहे पर सुबह के समय काफी संख्या में ऐसे पशु बैठे हुए आसानी से मिल जाएंगे। वहीं कुछ पशु एक दूसरे के साथ जोर आजमाइश करते हुए भी देखे जा सकते हैं। कुछ ऐसा ही हाल रैदोपुर तिराहे और आराजीबाग मुहल्ले का भी है। जहां ऐसे छुट्टा पशुओं की भरमार है।
कोट
नगर क्षेत्र में इनको पकड़कर गोशालाओं में भेजने की जिम्मेदारी नगर निकायाें की और गांवों में ग्राम पंचायतों की है। लेकिन इसमें लापरवाही की जा रही है। यह देखने में भी आ रहा है लोग अपने दुधारू पशुओं को भी सड़कों पर छोड़ रहे हैं। जिन्हें देखकर लगता है कि सारे पशु छुट्टा हैं। -डा. मनोज सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।