आजमगढ़। गांव से लेकर कस्बे तक लोग छुट्टा पशुओं से परेशान हैं। छुट्टा पशु खेतों में जहां फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं तो वहीं सड़कों पर डेरा जमाकर सुगम राह में गतिरोध पैदा कर रहे हैं। हालत यह है कि रात के अंधेरे में सड़कों पर संभल कर नहीं चले तो छुट्टा पशुओं से टकराना तय है। प्रशासन की ओर से बनाए गए अस्थायी गोवंश आश्रय स्थलों से लोगों में उम्मीदें थी कि इनसे निजात मिलेगी पर ऐसा हो नहीं पाया। शहर की सड़कों पर छुट्टा पशुओं का झुंड अभी भी लोगों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में धान, अरहर, भुट्टा व बाजरे आदि की फसलें खेतों में लहलहा रही हैं जिसे दिनरात छुट्टा पशु रौंद रहे हैं। इससे किसानों की परेशानी बढ़ गई है। उन्हें अब खेतों की रखवाली भी करनी पड़ रही है। प्रशासन की ओर से छुट्टा पशुओं को पकड़कर गोवंश आश्रय स्थलों में रखने के सख्त फरमान के बावजूद किसानों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। फसल से किसानों को काफी उम्मीदें रहती हैं लेकिन छुट्टा पशु पिछले कई सालों से उनकी उम्मीदों पर पानी फेर रहे हैं। किसान गोविंद, राहुल, राजकमल व सुबाष आदि का कहना है कि छुट्टा पशु झुंड बनाकर खेतों में घुस जाते हैं और फसलों को नष्ट कर देते हैं। सबसे अधिक आतंक पल्हनी ब्लाक क्षेत्र में है। पल्हनी ब्लाक के गेलवारा गांव में पशुओं का इस कदर आतंक है कि पशु घरों में चले जा रहे है। जिससे ग्रामीणों को परेशान होना पड़ रहा है। वहीं फसलों को भी नुकसान पहुंचा रहे। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. धर्मेंद्र पांडेय ने कहा कि हमारे पास जितनी गोशालाएं है सभी में पशु भरे हुए हैं। गोशाला में स्थान कम है। इसलिए शासन की मंशा के अनुरूप जिले में दो और स्थायी गोशाला व प्रत्येक ब्लाकों में दो-दो अस्थायी गोशाला बनाए जा रहे हैं। निर्माण पूर्ण होने के बाद छुट्टा पशुओं से राहत मिलेगी। विभाग अभी भी कोशशि कर रहा है कि पशुओं को गोशाला में भेजा जाए।