आजमगढ़। गैर इरादतन हत्या के एक आरोपी को अदालत ने दोषी पाते हुए दस वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जबकि इसी मामले का एक अन्य आरोपी के नाबालिग होने के कारण उसकी पत्रावली अलग कर दी गई थी। मंगलवार को यह सजा अपर सत्र न्यायाधीश बीडी भारती ने सुनाया। घटना दीदारगंज थानाक्षेत्र की है।
मुकदमे के अनुसार दीदारगंज थानाक्षेत्र के सदरपुर कैथौली गांव निवासी फूलचंद ठेला, रिक्शा चलाता था। 21 अक्टूबर 2002 की शाम लगभग 6 बजे अपना ठेला खड़ा कर घर वापस लौट रहा था तभी मछली मारने की रंजिश को लेकर गांव का प्रदीप पुत्र बहादुर व इसका नाबालिक भाई डंडे से मारकर फूलचंद को घायल कर दिया। घायलावस्था में उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां तीन दिन बाद 24 अक्टूबर को मौत हो गई। इस मामले में मृतक की पत्नी की तहरीर पर दोनों हमलावरों के विरूद्घ संबधित थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने जांच कर दोनों आरोपियों के विरूद्घ आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। मुकदमे के परीक्षण के दौरान शासकीय अधिवक्ता जगदंबा प्रसाद पांडेय ने अजय कुमार, डा. राजेंद्र कुमार, दिलीप कुमार पांडेय, हीरालाल सिंह यादव, इंद्रावती व सुरेश को बतौर साक्षी अदालत में पेश किया और तर्कों को रखा। अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष के तर्कों को सुनने के बाद आरोपी प्रदीप को गैरइरादतन हत्या का दोषी पाते हुए उक्त सजा का निर्धारण किया।