ब्लाॅक के ईश्वरपुर गांव में चकबंदी प्रक्रिया की अनियमितता की जांच करने मंगलवार को लखनऊ से टीम आई। जांच में गड़बड़ी सही मिली, अधिकारियों ने गांव वालों के साथ बैठककर पूरे मामले में बयान लिया। साथ ही अन्य कागजी कार्रवाई कर चले गए। सदर तहसील के ईश्वरपुर में चकबंदी प्रक्रिया में अनियमितता की शिकायत शासन तक की गई थी। बुधवार को जांच टीम गांव में धमक पड़ी। बता दें कि जिला मुख्यालय आजमगढ़ से रानी की सराय शाहगंज होते हुए यह सड़क लखनऊ तक जाती है। ईश्वरपुर गांव इसी मार्ग पर पड़ता है। गांव की जमीन काफी कीमती और व्यावसायिक है। गांव की चकबंदी बन्दोबस्त 1990 में बन रहा था। बन्दोबंस्त अधिकारी चकबंदी और उपसंचालक चकबंदी के निर्णय के बाद गांव का जनरल कब्जा परिवर्तन कराया गया था। पैमाइश व कब्जा परिवर्तन के बाद गांव के संपूर्ण कास्तकार अपने पैमाइश शुदा रकबे पर अपनी चक पाकर काबिज हो गये, किन्तु गांव का बन्दोबस्त बनकर तैयार नहीं हो सका। इस कारण धारा 52 का प्रकाशन समय में नहीं हो सका, इधर सन् 2021-22 में धारा 52 का प्रकाशन हो रहा है। सन् 1990 के कब्जा परिवर्तन के बाद अधिकतम कास्तकारों ने अपने-अपने जमीनों पर मकान, दुकान बना ली। इधर जब कब्जा परिवर्तन होने के बाद गांव के धारा 52 के प्रकाशन के पहले धारा 42 की सुनवाई होने लगी तो बड़े पैमाने पर कास्तकारों के खिलाफ उत्पीड़न का प्रकरण सामने आने लगा। कास्तकारों ने इस संबंध में अधिकारियों से शिकायत भी की। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इस पर कास्तकारों ने इसकी शिकायत लखनऊ तक कर दी।