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Azamgarh News: इमाम चौकों और इमामबाड़ों में रखे गए ताजिये

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नवीं मुहर्रम पर शुक्रवार को तजियों को इमाम चौकों और इमामबाड़ों पर रखा गया। लोगों ने इमाम हुसैन और कर्बला के 72 शहीदों को याद किया और उनकी फातिहा कराई। उधर, मजलिस में उलेमा ने कर्बला के मंजर बयान किए जो अजादार जारोकतार रो पड़े। वहीं अंजुमनों ने नौहा मातम कर माहौल का और भी गमगीन बना दिया। नवीं मुहर्रम की रात सरायमीर कस्बा सहित ग्रामीण क्षेत्रों में इमाम चौक व इमामबाड़ों में ताज़िये रखे गए। जहां पर ताज़ियादारों ने शब्बेदारी करके नौहा और मातम किया। पूरी रात या हुसैन या हुसैन की सदाएं गूंजती रहीं। कस्बा में नवीं मुहर्रम का क़दीमी ताबूत, अलम और दुलदुल का जुलूस परंपरागत तरीके से अन्जुमन तन्जीमे हुसैनी के तत्वावधान में इमामबाड़ा बारगाहे हुसैनी से मजलिस के बाद निकला। जुलूस निर्धारित रास्तों से होता हुआ देर शाम चौक स्थित जवाद मंज़िल पहुंचा, जहां पर मौलाना ने शबे आशूर को इमाम हुसैन के खैमों का मंज़र बयान किया तो मातमदार अपने गम की शिद्दत को बर्दाश्त न कर सके और फूट-फूटकर रोने लगे। मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना शाहिद आज़मी ने कहा कि कर्बला की जंग में हज़रत इमाम हुसैन और उनके छह महीने के बेटे अली असगर सहित 70 अन्य को शहीद कर दिया गया। यज़ीदी फौज का जुल्म यहीं खत्म नहीं हुआ। पैगम्बर मोहम्मद साहब के घराने की महिलाओं के खेमों (कैम्पों) में आग लगा दी गई जिसमें बच्चे भी शहीद हुए। यह बयान सुनना था कि मौजूद महिलाएं, बच्चे और पुरुष रोने लगे। जुलूस में अंजुमन मासूमिया डीघियां, अंजुमन जाफ़रिया रसूलपुर, अंजुमन अज़ाए हुसैन निकामुद्दीनपुर, अंजुमन गुन्चये अब्बासिया कोरौली ने नौहा व मातम किया। जुलूस का संचालन मोहम्मद हुसैन ने किया।
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