छुट्टा मवेशियों का आतंक समाप्त नहीं हो रहा है। खुद के साथ ही लोगों के जान के भी ये दुश्मन बने हुए है। आए दिन इनके चलते सड़क हादसे होते है और लोग घायल होते है। कई हादसों में इनके चलते मौत तक हो गई है। वहीं कई जगहों पर से खुद भारी वाहनों की चपेट में आकर मृत जो जाते है।
शहर क्षेत्र में तो इनका आतंक कायम है। जिस रास्ते से यह गुजरते है, वह रास्ता कुछ देर के लिए ही सही खाली सा हो जाता है। वहीं कई रास्तों पर ये जाम का भी बड़ा कारण बनते है। योगी सरकार ने गो आश्रय स्थलों की स्थापना कर सड़कों पर छुट्टा घूमने वाले मवेशियों को पकड़ कर इनमें रखने का निर्देश दिया।
इसके बाद भी काफी संख्या में गौवंश शहर से लेकर ग्रामीणांचल तक की सड़कों पर घूम रहे है और जाम के झाम का कारण बनने के साथ ही हादसों का भी बड़ा कारण बन रहे है। रविवार की शाम ही फूलपुर कोतवाली क्षेत्र में बाइक सवार छुट्टा मवेशी से टकरा कर सड़क पर गिर पड़ा और पीछे से आ रही ट्रक उसे रौंदते हुए निकल गई। जिससे उसकी मौत हो गई।
वहीं रानी की सराय थाना क्षेत्र में तीन माह पूर्व छुट्टा मवेशी से टकराने के बाद बाइक पलट गई थी। जिसमें बाइक सवार घायल हो गए थे और इलाज के दौरान एक की मौत भी हो गई थी। सर्वाधिक सड़क हादसों में मवेशियों की मौत फिलहाल आजमगढ़-जौनपुर मार्ग पर बरदह थाना क्षेत्र में देखने को मिलती है।
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शहर में सांड का आतंक
शहर क्षेत्र के चौक से पुरानी सब्जीमंडी, कटरा, बदरका होते हुए पांडेय बाजार तक एक बड़े सिंग वाले सांड का खासा आतंक है। प्राय: यह तीन-चार की संख्या में अन्य सांड के साथ इस रास्ते पर चक्रमण करता है। जब साड़ों का यह झुंड सड़क पर निकलता है तो लोग या तो रास्ता बदल देते है या उनके गुजर जाने के बाद ही अपने गंतव्य को जाते है। कारण यह है कि कब ये बिगड़ जाए और आपस में लड़ने के साथ ही आसपास मौजूद लोगों व वाहनों पर हमला कर दें कुछ कहा नहीं जा सकता है। खड़े सिंग वाला सांड तो प्राय: रिक्शा व आटो में पीछे सिंग फंसा कर पलट तक देता है।