जिलाधिकारी विशाल भारद्वाज ने चीनी मिल सठियांव के अतिथि गृह परिसर में वार्षिक सामान्य निकाय की बैठक की। डीएम ने चीनी मिल के डेलिगेट के साथ बैठक कर 11 बिंदुओं पर विचार-विमर्श करके सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया। हंगामा के बीच पुस्तकालय, गन्ना क्लिनिक, कृषक सहायता केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव पास हो गया। डीएम ने पुस्तकालय में पुस्तकों की संख्या बढ़ाने पर विशेष बल दिया।
डीएम ने कहा कि नई प्रजातियों के गन्ने की बुआई करें। ताकि चीनी मिल के हित में रहे। मिल में गन्ना आपूर्ति करने वाली सड़कों की मरम्मत कराने के संबंध में लोगों से जानकारी मांगी। जीएम अनिल चतुर्वेदी ने 11 सूत्रीय एजेंडा को पढ़कर सुनाया। उन्होने बताया कि चीनी मिल सठियांव की स्थापना सन् 1974 में की गई। प्रथम पेराई सत्र 1975-76 से शुरू हुआ, आगे चलकर पेराई सत्र 2007-8 मे बंद हो गया। पुनः सरकार के सहयोग से किसानों के हित में 2014-15 मे चीनी मिल को आधुनिक ढंग से बनाकर पहला पेराई सत्र 2015-16 से पुनः आरंभ हुआ। उन्होने बताया कि सन 1997 के बाद वार्षिक सामान्य निकाय की बैठक अब 2023 मे हुई है। बैठक में वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए चीनी मिल संघ कार्यालय लखनऊ द्वारा स्वीकृत बजट का अनुमोदन किया गया।
मुख्य गन्ना अधिकारी त्रिलोकी सिंह ने कहा कि पिछले पेराई सत्र में गन्ना सर्वे कम था, जो वर्तमान में दो हजार हेक्टेयर बढ़ा है। यह भी अवगत कराया गया कि पेराई सत्र 2023-24 के लिए चीनी मिल के रिपेयर व मरम्मत का कार्य 50 प्रतिशत पूरा हो गया है। जिलाधिकारी द्वारा पेराई सत्र 2023-24 में प्रतिनिधि एवं संचालक मंडल के सदस्यों निर्वाचन के लिए क्षेत्र अवधारणा पर विचार कर दो संचालक मंडल सदस्यों को घटाया गया। जिन कृषकों द्वारा विगत पांच वर्षों से गन्ना आपूर्ति नहीं किया गया है, ऐसे कृषकों की सदस्यता समाप्त करने पर चर्चा की गई।
सीए सुरेन्द्र कुमार ने बताया कि चीनी मिल एक अरब 19 करोड़ घाटे में है। जिसमें 72 करोड़ ब्याज का शामिल हैं। गन्ना सुरक्षण एवं अध्यरपण के लिए भेजे जाने वाले सुरक्षण का प्रस्ताव पारित किया गया। इस दौरान जीएम अनिल चतुर्वेदी, जिला गन्ना अधिकारी अशर्फी लाल, पूर्व उप सभापति पराग यादव, आनंद उपाध्याय, यशवंत सिंह, रामदरश यादव आदि मौजूद रहे।
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