रानी की सराय के दिलौली में डिजल इंजन चलाकर खेतों की किसान कर रहे सिंचाई।संवाद
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आजमगढ़। जनपद में इस बार दो लाख 10 हजार 87 हेक्टेयर में धान की रोपाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। लेकिन बारिश न होने और नहरों में पानी न छोड़े जाने से किसान धान की रोपाई से मुंह मोड़ रहे हैं। जिसका परिणाम है कि जनपद में अब तक मात्र 20 प्रतिशत ही धान की रोपाई हो सकी है। वहीं जिन किसानों ने धान की रोपाई कर ली है उसे बचाने में उनकी कमर टूट रही है। मौसम की बेरूखी की किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। 15 जून से 15 जुलाई तक मात्र 29.33 मिमी बारिश होने से किसानों की परेशानी और बढ़ गई है। इस बार कृषि विभाग द्वारा जनपद में दो लाख 10 हजार 87 हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की रोपाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। जिसके सापेक्ष अब तक मात्र 20 फिसदी यानि लगभग 20 हजार हेक्टेयर में ही धान की रोपाई हो सकी है। जिन किसानों ने धान की रोपाई कर ली है उनके सामने अपनी फसल को बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। क्योंकि एक तरफ बिजली की आंख मिचौली जारी है तो दूसरी तरफ नहरों में पानी गायब है। ऐेसे में किसान पंपिंग सेट के सहारे अपनी फसलों को बचाने में जुटे हुए हैं। जिसके लिए उन्हें काफी क्षति उठानी पड़ रही है। वहीं मौसम की बेरूखी देख बहुत से किसान धान की रोपाई को लेकर असमंजस में हैं। उनकी समझ में नहीं आ रहा है कि वह धान की रोपाई करें या नहीं करें। जिला कृषि अधिकारी डा. गगनदीप सिंह ने बताया कि इस बार जनपद में दो लाख 10 हजार 87 हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की रोपाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। लेकिन नहरों में पानी न होने और बारिश न होने के कारण अभी तक मात्र 20 फीसद ही धान की रोपाई हो सकी है। लेकिन बारिश होने के बाद इसमें बढ़ोत्तरी हो सकती है।