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शंकराचार्य ने भारत का भ्रमण कर वैदिक संस्कृति का पुनरुद्धार किया : तारकेश्वर

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आदि गुरु शंकराचार्य की जयंती मंगलवार को नगर के एलवल स्थित ब्राह्मण समाज कल्याण परिषद के शिविर कार्यालय में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। लोगों ने आदि गुरु शंकराचार्य के चित्र माल्यार्पण किया। संस्था के अध्यक्ष ब्रजेश नंदन पांडेय ने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य अद्वैत वेदांत के प्रवर्तक एवं महान दार्शनिक थे। उन्होंने प्राचीन भारतीय परंपरा के विकास तथा सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया। बताया कि सनातन धर्म के संरक्षण के लिए शंकराचार्य ने विभिन्न अखाड़ों की स्थापना की तथा शास्त्र और शस्त्र दोनों के माध्यम से धर्म की रक्षा करने वाले नागा साधुओं को दीक्षित कर उन्हें संगठित किया। साथ ही, भारत के चारों कोने में शृंगेरी मठ, गोवर्धन मठ, शारदा मठ एवं ज्योतिर्मठ की स्थापना कर सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ किया। संरक्षक तारकेश्वर मिश्र ने कहा कि शंकराचार्य ने पूरे भारत का भ्रमण कर वैदिक संस्कृति का पुनरुद्धार किया और देश को एकता के सूत्र में बांधने का कार्य किया। महामंत्री मनोज कुमार त्रिपाठी, विश्वदेव उपाध्याय, सतीश कुमार मिश्र, गिरीश चतुर्वेदी, आनंद उपाध्याय ने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर गिरिजा सुवन पांडेय, राधे श्याम मिश्र, रामाश्रय उपाध्याय, रामकवल चतुर्वेदी, कृष्ण कुमार उपस्थित रहे।
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