आजमगढ़। दहेज को लेकर विवाहिता की हत्या के मामले में अदालत ने आरोपित पति और सास को दोषी पाते हुए सात-सात वर्ष की कैद के साथ दोनों को पांच-पांच हजार रुपया जुर्माना लगाया गया। यह सजा अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट राजीव शुक्ला की अदालत ने सुनाई। घटना देवगांव थाना क्षेत्र के टीकरगढ़ गांव की है। देवगांव थाना के नरसिंहपुर गांव निवासी शीला पत्नी सूरज ने अपनी पुत्री रीना की शादी वर्ष 2015 में इसी थाना क्षेत्र के टीकरगढ़ गांव में रामकिशुन के पुत्र रामनयन के साथ की थी। शादी के बाद वह विदा होकर ससुराल गई। दो अप्रैल 2016 को उसकी मौत हो गई। इस मामले में मृतका की मां ने स्थानीय थाने में दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। दर्ज कराए गए मुकदमे में आरोप लगाया कि विवाहिता के पति रामनयन और सास नरमा देवी दहेज को लेकर प्रताड़ित करते थे। घटना की सुबह लगभग पांच बजे इसी मामले को लेकर उसको जला दिए। घायलावस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उसकी मौत हो गई। इस मामले में देवगांव थाना पुलिस ने आरोपित किए गए लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। मुकदमे के परीक्षण के दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ से पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता अभयदत्त गोंड, प्रमोद पांडेय और हरेंद्र सिंह ने वादी सहित कुल नौ गवाहों को अदालत में पेश किया और तर्कों को रखा। अदालत ने उभय पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद विवाहिता के पति और सास को दहेज हत्या का दोषी पाते हुए उक्त सजा का निर्धारण किया।