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सबसे बड़ी पूजा माता पिता की सेवा : सर्वेश जी महाराज

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माता-पिता ही सर्वोपरि होते हैं। आप मंदिर जाएं अथवा ना जाएं, पूजा, पाठ, तीरथ, व्रत, दान, पुण्य, भंडारा करें या ना करें, अपने माता-पिता की सेवा अवश्य करें। क्योंकि माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है। जो माता-पिता का अपमान करता है, उनका दिल दुखाता है, उसे नर्क में भी जगह नहीं मिलती। धरती पर माता पिता का स्थान सबसे ऊंचा है। उक्त बातें श्री बाबा भंवरनाथ मंदिर में चल रही श्रीराम कथा के छठवें दिन सोमवार को संत सर्वेश जी महराज ने कही। उन्होंने कहा कि हमें अपने बच्चों को अच्छे संस्कार व अच्छी शिक्षा देनी चाहिए। क्योंकि शिक्षा के बगैर मनुष्य पशु के समान होता है और संस्कार से हमारे बच्चे में कभी भटकाव नहीं आता। वह सही रास्ते पर चलते हैं और सदा जीवन में सम्मान के पात्र बनते हैं। अपने बच्चों को हमेशा प्रणाम करना सिखाना चाहिए। भगवान, माता पिता व गुरु को हमेशा माथा रखकर सादर प्रणाम करना चाहिए। इसमें हमें शर्म नहीं अपितु गर्व होना चाहिए। जिसका कोई गुरु नहीं उसका जीवन शुरू नहीं। कहा कि जीवन में गुरु का होना बहुत ही महत्वपूर्ण होता है जो आपको अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है। इसीलिए तो कहा गया है कि गुरु को भगवान से पहले प्रणाम करना चाहिए। सबसे बड़ी बात सनातन धर्म में कहीं हाथ मिलाना नहीं लिखा गया, यह दूसरे धर्म के लोग करते हैं। सर्वेश जी महाराज ने कहा कि सनातनी को कभी खाना शब्द का प्रयोग नहीं करना चाहिए। सदा भोजन शब्द का प्रयोग ही करना चाहिए। भोजन शब्द के प्रयोग करने से वह प्रसाद बन जाता है और भोजन से पूर्व हमें प्रणाम अवश्य करना चाहिए। प्रत्येक सनातनी को तिलक अवश्य लगाना चाहिए। तिलक लगाना हमारी संस्कृति हमारी पहचान है। इस मौके पर केशव शास्त्री, पप्पू मिश्रा, अजय शुक्ला, अनुपम शास्त्री, दिनेश लाल, दयाशंकर पांडेय आदि मौजूद रहे।
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