आज सतीश कौशिक हमारे बीच नहीं है लेकिन उनकी यादें जनपद से जुड़ी हैं। लगभग दो वर्ष पूर्व सतीश कौशिक का जिले में आगमन हुआ था। उस समय वह लालबिहारी मृतक के जीवन पर ‘कागज’ नामक फिल्म का निर्माण कर रहे थे। सतीश कौशिक के निधन से जहां फिल्म नगरी में शोक में है। वहीं जनपद में लाल बिहारी मृतक भी काफी दुखी हैं। क्योंकि लाल बिहारी मृतक ने अपने जीवन में खुद को जिंदा साबित करने के लिए जो संघर्ष किया था उससे प्रभावित होकर सतीश कौशिक ने उनके जीवन और संघर्षों को रुपहले पर्दे पर उतारने का निर्णय लिया था। इसके लिए सतीश कई बार मृतक से मिले थे। फिल्म निर्माण के दौरान वह आजमगढ़ चार से पांच बार आए थे। यहीं रुके और लालबिहारी से मुलाकात की और उनसे फिल्म निर्माण की अनुमति लेकर फिल्म का निर्माण किया। फिल्म बनी और रीलिज भी हुई। हालांकि फिल्म रीलिज के बाद लाल बिहारी ने सतीश पर फिल्म की कहानी में बदलाव करने और उनके जीवन के संघर्ष को दूसरे रूप में दिखाने का आरोप लगाया। लेकिन बृहस्पतिवार को जैसे ही उनके निधन की सूचना लाल बिहारी को हुई वह काफी दुखी नजर आए। कहा उनके निधन से वह मर्माहत हैं।