आजमगढ़। सरायमीर क्षेत्र के नोनारी स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल में तैनात चिकित्सक डा. सर्वेश रावत के आए दिन गैरहाजिर रहने की शिकायतें मिल रही थीं। डॉक्टर की अनुपस्थिति में अस्पताल आने वाले मरीजों में स्वीपर द्वारा दवा का वितरण किया जा रहा था। 25 अगस्त के अंक में अमर उजाला ने पेज नंबर चार पर ‘‘साफ-सफाई का काम छोड़ लोगों का इलाज कर रहा स्वीपर’’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। खबर का प्रकाशन होने बाद क्षेत्रीय आयुर्वेदिक व यूनानी अधिकारी अक्षय लाल ने चिकित्सक का वेतन रोक दिया है। वहीं मंगलवार को उक्त प्रकरण की जांच के लिए लखनऊ से भी टीम नोनारी आयुर्वेदिक अस्पताल पहुंची थी। सरकार की ओर से स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए तरह-तरह के उपाय किए जा रहे हैं लेकिन स्वास्थ्य कर्मी ही सरकार की मंशा पर पानी फेरने में जुटे हुए हैं। 24 अगस्त को आयुर्वेदिक अस्पताल नोनारी में चिकित्सक की अनुपस्थिति में स्वीपर मरीजों में दवा का वितरण करते हुए पाया गया था। वहां मौजूद लोगों ने बताया कि वह लोग स्वीपर को ही डाक्टर मानते हैं। चिकित्सक कभी-कभार ही अस्पताल में मिलते हैं। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक व यूनानी अधिकारी अक्षय लाल ने कहा कि लखनऊ टीम ने जांच तो की है लेकिन उन्हें जांच में क्या मिला इसकी कोई जानकारी नहीं है। लेकिन उनके द्वारा उक्त चिकित्सक का वेतन रोक दिया गया है। मुख्यमंत्री आरोग्य मेला का आयोजन बीते 21 अगस्त को जिला आयुर्वेद चिकित्सालय एलवल पर नहीं किया गया था। मरीज यहां पहुंचे थे और अस्पताल पर ताला बंद होने के चलते बैरंग लौट गए थे। अमर उजाला ने इसे 22 अगस्त के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया तो जिला आयुर्वेद अधिकारी ने संज्ञान लेते हुए चिकित्सा अधीक्षिका से स्पष्टीकरण तलब कर लिया। स्पष्टीकरण मिलने पर बाद जिला आयुर्वेद अधिकारी अक्षय लाल ने चिकित्सा अधीक्षिका डॉ. मोनिका अग्रवाल, स्टाफ नर्स मीरा वर्मा, प्रेमलता यादव, फार्मासिस्ट रामसेवक व धोबी प्रमोद कुमार चौधरी का वेतन रोकने का निर्देश जारी कर दिया।