RO running without license in the city
आजमगढ़। शहर में बिना लाइसेंस के आरओ प्लांट धड़ल्ले से चलाए जा रहे हैं। सेहत के लिए यह ठीक है इसकी जांच कभी नहीं होती। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग के अधिकारी इस ओर ध्यान ही नहीं दे रहे हैं। इस कारण बिना मानक के पानी का सेवन करने से लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। जिले में शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक जगह-जगह आरओ प्लांट खुले हैं। मजे की बात तो यह है कि इनमें से किसी के पास लाइसेंस ही नहीं हैं। इसके बाद भी वह पानी बेचकर मोटी रकम कमा रहे हैं। आरओ पानी अवैध तरीके से बेचा जा रहा है। प्रतिदिन आरओ प्लांट से सरकारी कार्यालय, निजी कार्यालय, घरों, दुकानों शादी सहित अन्य समारोहों में भी इस पानी की आपूर्ति हो रही है। पानी में कैल्शियम, मैग्निशियम, आयरन आदि कितनी मात्रा में है। इसकी जांच तक नहीं की जा रही है। ऐसे में इस पानी को अवैध तरीके से बेचा जा रहा है। इनकी आपूर्ति करने वालों के पास न तो लाइसेंस है, न ही एनओसी। जनपद के 22 विकास खंडों में बिना लाइसेंस के संचालित आरओ प्लांट में जमकर पानी की बर्बादी की जा रही है। बताया जा रहा है कि 20 लीटर आरओ पानी बनाने के लिए करीब 100 लीटर पानी बर्बाद होता है। भू-गर्भ जल विभाग के जल वैज्ञानिक आनंद प्रकाश ने बताया कि जनपद में जगह-जगह आरओ प्लांट संचालित हो रहे हैं। इनमें से एक भी आरओ प्लांट के लिए लाइसेंस नहीं लिया गया है। इनके खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी डीके राय ने बताया कि वह सिर्फ बोतल बंद पानी की जांच कर सकते हैं। खुले में लगे आरओ प्लांट की जांच उनके कार्य क्षेत्र से बाहर है। वह लखनऊ की एक राष्ट्रीय संस्था से पानी की जांच कराते हैं।