फर्जी और कूटरचित प्रमाणपत्रों के आधार पर परिषदीय विद्यालयों में नियुक्ति पाने वाले शिक्षकों के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से एक सप्ताह के अंदर तक सूचना तलब की है। अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा रेणुका कुमार ने इस बारे में बीएसए को आदेश जारी कर दिया है। एसटीएफ की जांच में 76 जालसाजों ने फर्जी प्रमाणपत्रों से बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में सहायक अध्यापक की नौकरी प्राप्त कर ली थी। फर्जी शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर, उनकी सेवा समाप्ति के आदेश और वेतन वसूली के लिए जारी किए गए रिकवरी सर्टिफिकेट की प्रति भी उपलब्ध कराने को कहा है। शासन के निर्देश पर वर्ष 2018 से ही एसटीएफ फर्जी शिक्षकों की जांच कर रही है। जांच शुरू होने के बाद कई फर्जी शिक्षकों की सेवा समाप्त कर उन्हें उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया गया। जिले में कुल छह शिक्षक संदिग्ध पाए गए हैं। जिसमें तीन की सेवा समाप्त कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। जिसमें तहबरपुर ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय केशवपुर बरतानी में तैनात अध्यापक वरुणेश कुमार, लालगंज के प्राथमिक विद्यालय इस्माइलपुर बरहती में तैनात अरुण कुमार मिश्र व अतरौलिया के प्राथमिक विद्यालय भिउरा में रिंकी सिंह शामिल है। वहीं बाकी के तीन शिक्षकों की जांच चल रही है। उनका अभिलेख सत्यापन के लिए विश्वविद्यालयों को भेजा गया है लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण अभी तक उनका सत्यापन नहीं हो सका है। संक्रमण की रफ्तार धीमी होने पर विभाग उनके सत्यापन की तैयारी तेज कर दी है। फर्जीवाड़ा पुष्ट होने पर संबंधित शिक्षकों की सेवा समाप्त हो जाएगी और उनके खिलाफ थाने में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया जाएगा।