आजमगढ़। गांव को स्वच्छ बनाने के लिए पंचायतीराज विभाग ने पहल की शुरू की है। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत ब्लॉक स्तर पर प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट (पीडब्लूएमयू) की स्थापना कराई जाएगी। इससे प्लास्टिक कचरा निस्तारण से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। शहर से लेकर गांव तक में प्लास्टिक कचरा बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है। इससे शहर में जहां सीवर लाइनें और नाले चोक हो रहे हैं वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों की उर्वरक क्षमता भी इस कचरे से कम हो रही है। प्लास्टिक के बोतल, पालीथिन, चिप्स, नमकीन आदि के रैपर आदि बड़ी समस्या बन रहे हैं। इस कचरे के निस्तारण के लिए यूनिटों की स्थापना होनी है। इनमें गांव-गांव से प्लास्टिक कचरा लाया जाएगा। उन्हें मशीनों से अलग किया जाएगा और फिर धुलाई कर इसका पुन: उपयोग करने वाली कंपनियों को बेचा जाएगा। प्लास्टिक कचरे को बेचने से जो आय होगी उससे इस प्लांट के संचालन का कार्य होगा। ब्लॉक स्तर पर प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट की स्थापना का खर्च पंचायतें उठाएंगी। प्रत्येक यूनिट पर 16 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। शेष जो राशि खर्च होगी उसे ग्राम पंचायत अपने स्तर से खर्च करेगी। गांवों से निकलने वाले प्लास्टिक कचरे को इकट्ठा किया जाएगा। इसके बाद ब्लॉक स्तरीय यूनिट में निस्तारण होगा। डीपीआरओ लालजी दुबे ने बताया कि प्लास्टिक धरती से कभी खत्म नहीं होता, वह माइक्रो प्लास्टिक के रूप में मिट्टी और पानी में घुल जाता है और हमारी पीढ़ियों दर पीढ़ियों को नुकसान पहुंचाता है। इसके लिए जिले के 22 ब्लाकों पर प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट की स्थापना होगी।