आजमगढ़। कोविड मरीजों के साथ ही नॉन कोविड (श्वांस रोगी) मरीजों को इलाज की सुविधा स्वास्थ्य महकमा नहीं मुहैया करा पा रहा है। रोजाना 40 से 50 नॉन कोविड श्वांस रोगी अस्पतालों में बेड के अभाव में इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं। जिला अस्पताल की इमरजेंसी के सामने मरीज बेहोश होकर गिर जा रहे हैं लेकिन उन्हें ऑक्सीजन नसीब नहीं हो पा रही है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन दस से ज्यादा मरीजों की मौत हो रही है। जिले में स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल हैं। कोरोना संक्रमण के दौर में तो इसकी स्थिति और भी अधिक दयनीय हो चुकी है। कोविड मरीजों के साथ ही नॉन कोविड मरीजों को भी इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है। बेड व ऑक्सीजन के आभाव में मरीज दम तोड़ रहे है और स्वास्थ्य महकमा के साथ ही प्रशासनिक अमला मूकदर्शक बना हुआ है। श्वांस रोगियों की संख्या इन दिनों काफी अधिक बढ़ गई है। इन रोगियों को आक्सीजन की जरूरत है लेकिन यह जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है। ऐसे मरीजों के इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक सरकारी व दो निजी अस्पतालों को चिह्नित किया है। इसमें जिला अस्पताल, श्रीसाईं व सहज अस्पताल शामिल हैं। तीनों अस्पतालों में ढाई सौ बेड की ही व्यवस्था है लेकिन किसी में जगह नहीं है। नॉन कोविड मरीजों के लिए मात्र 16 वेंटिलेटर हैं, जो जिला अस्पताल में हैं। ऐसे में तमाम गंभीर रोगियों को बेड व ऑक्सीजन के आभाव में नॉन कोविड मरीजों के मौत का आंकड़ा भी काफी बढ़ गया है। सिर्फ जिला अस्पताल में ही 10 से 12 मरीजों की प्रतिदिन मौत हो रही है। यह तो सरकारी आकड़ा है वही वास्तविकता तो इससे कई गुना अधिक का है। लेकिन जिला अस्पताल प्रशासन से लेकर स्वास्थ्य विभाग नॉन कोविड मरीजों के मौत का आंकड़ा भी सार्वजनिक नहीं कर रहा है।