लाटघाट। सगड़ी तहसील के रौनापार थाना क्षेत्र के रोशनगंज गांव निवासी सत्येंद्र यादव पांच वर्ष पूर्व लीबिया के बेन गाजी शहर में कमाने के लिए गए थे। वहां कंपनी के मालिक ने इनके साथ ही 19 युवकों का पासपोर्ट और वीजा अपने पास रख लिया था। इसके कारण ये लोग घर वापसी नहीं कर पा रहे थे। इन्होंने लीबिया में प्रदर्शन कर दिया। इसके बाद परिवार के लोगों ने भारतीय दूतावास से संपर्क किया। तब विदेश मंत्रालय ने मामले में हस्तक्षेप किया और सोमवार को सत्येंद्र यादव के साथ दो युवकों की घर वापसी हुई। शेष लोग 15 नवंबर तक अपने घर आएंगे।
सत्येंद्र यादव अपने परिवार के सपनों को पूरा करने के लिए लीबिया गए थे। बताया कि कंपनी के मालिक ने उनको बंधक जैसा बना लिया और वतन वापसी पर रोक लगा दी। वीजा ले लिया। लंबा समय बीत जाने के बाद भी अपने देश नहीं जाने दिया। सत्येंद्र यादव ने बताया कि वह 2019 में लीबिया पहुंचे। वहां सीमेंट की अलसहरी कंपनी है। वहां कुल 19 भारतीय काम करते हैं। बताया कि हम तीन तो वापस आग गए पर अभी 16 वहीं हैं। उनके साथ देवरिया जनपद के दो युवक वापस आए हैं।
सत्येंद्र यादव ने बताया कि वहां हम लोगों को 700 से 800 डॉलर महीने देने की बात हुई थी पर 200 से 300 डॉलर ही मिल रहा था। 12 से 14 घंटे काम लिया जाता था, जबकि 8 घंटे काम लेने की बात हुई थी। वहां और भी लोग हैं, जिन्हें डेढ़-दो साल से वेतन नहीं मिल रहा है। बताया कि उनका छह माह का वेतन बाकी है। 200 दीनार मिलते थे, उसी में पूरे महीना खाना होता था। पैसा खत्म हो जाने पर घर से मांगते थे।
बताया कि मालिक को अबू बकर कहा जाता है। वह दुबई में रहता है। कंपनी मालिक हम लोगों का शोषण करता है। हम करीब डेढ़ दो साल से घर आने का सपना देख रहे थे, जो अब जाकर साकार हुआ। सत्येंद्र तीन भाई हैं। उनके भाई रामाश्रय यादव, महेंद्र यादव हैं। तीनों भाई अलग रहते हैं। सत्येंद्र की पत्नी बिंदु है। पुत्र सत्यम, शिवम और एक लड़की बिट्टू है। सत्येंद्र यादव सोमवार की सुबह पांच बजे घर पहुंचे, तो परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्राम प्रधान जालंधर यादव भी पहुंचे। जालंधर ने कहा कि सत्येंद्र की वापसी से लोगों में खुशी है।