सगड़ी। ईंट पर जीएसटी बढ़ने से भट्टा संचालकों के ऊपर भट्ठा बंद करने का संकट मंडरा रहा है। भट्ठा संचालकों का कहना है कि अगर इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो अगले वर्ष वह ईंट भट्ठा बंद रखेंगे। पहले जो जीएसटी एक प्रतिशत लगती थी उसको बढ़ाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं जो जीएसटी पांच प्रतिशत लगती थी उसको बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दिया गया है। ऐसे में भट्ठा संचालकों के सामने संकट मंडरा रहा है। अगर सरकार जीएसटी पर विचार नहीं करती तो केंद्र और प्रदेश के ईट भट्ठा संगठन ने अगले वर्ष से ईंट भट्ठा बंद करने का निर्णय लिया है। सगड़ी तहसील क्षेत्र के ईट भट्ठा संचालकों का कहना है कि कोयला के दाम आसमान छू रहे हैं। वही कोयला भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। दूसरी तरफ जीएसटी भी बढ़ा दी गई है। भट्ठा मालिकों को कुछ नहीं सूझ रहा है कि हम लोग करें तो क्या करें। वहीं पिछले वर्ष जो ईंट प्रति ट्राली 11 हजार से 11.500 हजार रुपए बिक रहा था। वह 14500 रुपए से लेकर 15000 रुपए प्रति ट्राली बिक रहा है। यही हाल रहा तो इसमें और बढ़ोतरी हो सकती है। ईंट के दाम बढ़ने से उपभोक्ताओं को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। अजमतगढ़ ब्लॉक के ईट भट्ठा संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष कृष्ण कुमार राय ने बताया कि जीएसटी में बेतहाशा वृद्धि की गई है। जिसके चलते ईंट भट्ठा संचालकों को कुछ नहीं सूझ रहा है कि हम लोग करें तो क्या करें। वही पूरे देश के ईंट भट्टा संचालकों ने निर्णय लिया है कि अगर यही हाल रहा तो अगले वर्ष पूरे देश में ईट भट्ठा का संचालन बंद कर दिया जाएगा। जीएसटी बढ़ने से ईट भट्ठा बंद करने के अलावा कोई विकल्प दिखाई नहीं दे रहा है। रामेंद्र यादव भट्ठा संचालक ने बताया कि कोयला के दाम में भी बेतहाशा वृद्धि हुई है। वहीं जो कोयला नौ हजार से लेकर 9.5 हजार रुपए प्रति टन मिल रहा था। वहीं वह कोयला 18 से हजार रुपए लेकर 19 हजार प्रति टन मिल रहा है। साथ ही जीएसटी में भी बढ़ोतरी की गई है। जिसके कारण हमारे सामने विकल्प कम बचे हैं।