आजमगढ़। शहर के सिधारी स्थित एक मैरेज हॉल में आयोजित श्रीराम कथा में मंगलवार को प्रख्यात कथा वाचक आचार्य शांतनु जी महाराज ने भक्त और भगवान पर प्रकाश डाला। कहा कि नए भारत के निर्माण के लिए शिक्षा और संस्कार बेहद जरूरी हैं। महाराज कथा का शुभारंभ जन्मोत्सव की बधाई के साथ किया। उन्होंने कहा कि जब भगवान राम प्रगट हुए तो देवता भी आकाश मार्ग से पुष्प की वर्षा करने लगे। अयोध्या के नागरिक भगवान के दर्शन के लिए दौड़ पड़े। प्रभु को प्राप्त करने के लिए किसी भी प्रकार की बनावट दिखावट की आवश्यकता नहीं है। आप जैसे हो उसी प्रकार से बस परमात्मा को पाने के लिए दौड़ जाओ। उन्होंने भगवान की बाल लीलाओं का श्रवण कराते हुए उनके रूप दर्शन का वर्णन किया कि भगवान का रूप सर्वांग मधुर ही मधुर है। वल्लभाचार्य जी के मधुराष्टकं से उन्होंने भगवान के रूप सौंदर्य का वर्णन किया। कहा कि आज हम शिक्षित तो बना पा रहे हैं समझदार नहीं बना पा रहे हैं। शिक्षा और समझदारी में अंतर है और नए भारत का निर्माण यदि करना है तो शिक्षा के साथ-साथ संस्कार की भी अत्यंत आवश्यकता है। हम आने वाली पीढि़यों को पैसे कमाने की मशीन बना रहे हैं और ऐसे बालक कभी भी अपने माता पिता, परिवार, समाज व राष्ट्र का महत्व नहीं समझते। अहिल्या प्रसंग की चर्चा करते हुए आचार्य शांतनु ने कहा कि जीवन में जब भी कोई पाप हो जाए पाप को छुपाना नहीं चाहिए। पाप छुपाने से भारी होता है। आपको किसी ना किसी गुरु संत के सम्मुख प्रकट करना चाहिए तो आपकी रक्षा हो जाएगी।