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Azamgarh News: कवियों ने रचनाओं से सामाजिक मुद्दों पर सोचने के लिए किया प्रेरित

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मालटारी स्थित श्री गांधी पीजी कॉलेज में कविता पाठ करते बैजनाथ गवार। संवाद
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सगड़ी। श्रीगांधी पीजी कॉलेज मालटारी में बृहस्पतिवार को उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती की पूर्व संध्या पर परिसंवाद, लोक नृत्य और कविता पाठ में दूर-दराज से पहुंचे कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। साथ ही सामाजिक मुद्दों पर सोचने के लिए प्रेरित किया। कवियों की प्रस्तुति पर पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कवि अभिराज ‘बेदर्दी’ ने अपनी भोजपुरी रचना ‘चरकल बडेर संइयां घर कइसे थाम्ही, लागत बडूए अबकी बरखा गिरिहे दलानी’ सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। वहीं राजनाथ ‘राज’ ने ‘हिरन के साथ हैं हम जो भी चाहे सामने आए’ प्रस्तुत कर श्रोताओं को प्रभावित किया। डॉ. राजकुमार ‘आशीर्वाद’ ने ‘राधा न मिल सकी घनश्याम से, मिलके बिछड़ गई सीता भी राम से’ सुनाई। कवि बैजनाथ गवार ने ‘एक दिन जाड़ा में फिर हमरा गांवें आहिया चिरई’ सुनाकर लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। प्रो. अखिलेश चंद्र ने ‘लिवे दिहै मोहे जनम हो मइया’ के माध्यम से भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक कुरीति पर करारा प्रहार किया। कवि बालेदीन बेसहारा ने ‘पहिले सोचा समझा तब गले लगावा बबुआ...’ के जरिए समाज में फैली विसंगतियों को उजागर किया। कार्यक्रम में कवि घनश्याम यादव ‘रॉकेट’, कृष्ण देव ‘घायल’ सहित अन्य कवियों ने भी अपनी रचनाओं से श्रोताओं का मनोरंजन किया। जांघिया नृत्य की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में लोक संस्कृति की छटा बिखेरी। अध्यक्षता मुकेश राय और संचालन प्रोफेसर हसीन खान ने किया। संवाद
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