घाघरा के जलस्तर में बढ़ोतरी से देवारा क्षेत्र के लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। लोग अपने हाथ से खुद के आशियाने को ढहाकर पलायन कर रहे हैं। प्रशासन की बाढ़ चौकियां निष्क्रिय पड़ी हैं, इन पर तैनात कर्मचारियों का कहीं पता नहीं है। नाव की कमी के कारण स्कूल जाने वाले बच्चों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
सगड़ी तहसील के देवरांचल से होकर गुजरने वाली घाघरा नदी ने अब लोगों की मुसीबत को बढ़ा दिया है। बढ़ते जलस्तर और तेजी से हो रही कटान के कारण 13 घर कटान के मुहाने पर खड़े हैं। जिसके कारण लोग अपना आशियाना खुद ही ढहाकर पलायन करने को विवश हैं। हरैया विकासखंड के देवारा खास राजा गांव के झगरहवा बगहवा मौजा के रामकरन, द्वारिका, पुरूषोत्तम का मकान नदी की लहरों में समा गए। 13 ग्रामीणों के मकान कटान के मुहाने पर हैं।
दूसरी तरफ गांवों में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे बढ़ने लगा है। जिससे ग्रामीणों की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। नदी के मुहाने पर कन्हैया, रेखा, अवधू, साधू, शिवदास, गुल्लू आदि 13 लोगों के आशियाने खड़े हैं। कुछ लोग अपने सामान को स्कूल के पास ही रखे हैं। तो कुछ लोग नात रिश्तेदारों के यहां शरण लेने को विवश हुए हैं। ग्राम प्रधान रामसिंगार यादव ने बताया कि कटान की गति तेज हो गई है। तहसील प्रशासन मौन साधे हुए है। हमलोग डीएम से मिलकर शिकायत दर्ज कराएंगे। यही हालत रही तो यह बस्ती जल्द ही घाघरा नदी में समाहित हो जाएगी। किसान का खेत खलिहान मकान कट जाता है, लेकिन उसे तहसील से मुआवजा नहीं मिलता है। पिछले वर्ष दर्जनों ऐसे किसान हैं जिनका मकान और जमीन कट गए और मुआवजा नहीं मिला।
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कागजों में चल रहीं बाढ़ चौकियां
लाटघाट। प्रशासन की ओर से महुला गढ़वल बांध पार कुल बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। जिसमें महुला, गांगेपुर, हाजीपुर, जमुआरी, इस्माइलपुर, हैदराबाद, कुड़ही, सहदेवगंज, उल्टहवा और शिवपुर शामिल हैं। सभी बाढ़ चौकियां कागज में अलर्ट कर दी गई हैं। पर मौके पर निष्क्रिय हैं। राजस्व विभाग को छोड़कर संबंधित एक भी कर्मचारी बाढ़ चौकी पर नहीं रह रहे हैं। पशुपालक, बीमार व्यक्ति, विकास से संबंधित लोग चक्कर काट कर चले जा रहे हैं और कहीं भी बाहर चौकी का बोर्ड तक नहीं लगाया गया है।