फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Azamgarh News: रिटायर्ड छह कर्मचारियों की रोकी पेंशन, डीएफओ बलिया कर रहे जांच

विज्ञापन
विज्ञापन
वन विभाग में 1992 में माली के पद पर 11 कर्मचारियों की नियुक्ति में गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद उच्चस्तरीय जांच चल रही है। हालांकि उक्त नियुक्ति प्रकरण में सात कर्मचारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। विभाग ने रिटायर्ड हो चुके छह कर्मचारियों की पेंशन रोक दी है। साथ ही एक बाबू का पद संभाल रहे कर्मचारी के खिलाफ चार्ज शीट चल रही है। इसे लेकर विभाग में खलबली है।
विज्ञापन

वन विभाग में 1992 में माली के पद पर 11 कर्मचारियों की तैनाती का आदेश हुआ। शासन ने कुछ दिन बाद इसे खारिज कर दिया। इधर, वन विभाग के जिम्मेदार अफसरों ने 11 लोगों की तैनाती कर दी। यह मजे से नौकरी करते रहे। इतना ही नहीं 2011 में स्थायीकरण कर प्रोन्नति भी दी गई। कुछ सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन का भी लाभ ले रहे थे। इसकी पोल तब खुली जब सेवानिवृत्त एक कर्मचारी की पेंशन व अन्य का वेतन रोकने के लिए प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी प्रभाग आजमगढ़ की ओर से मुख्य कोषाधिकारी को पत्र लिखा गया। वेतन व पेंशन रुकने के बाद कर्मचारियों ने कोर्ट का सहारा लिया। कोर्ट के आदेश पर वन विभाग ने उक्त सभी कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया। वहीं जांच में कुछ कर्मचारियों की संलिप्तता पाई गई। इसमें छह लोग रिटायर्ड हो चुके हैं, एक बाबू कार्यरत है। विभाग ने छह रिटायर्ड कर्मचारियों की पेंशन समेत अन्य भुगतान रोक दिए गए हैं। वहीं बाबू के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई के लिए चार्जशीट चल रही है। हालांकि अब भी वन विभाग के आलाधिकारी इस मामले को लेकर कुछ बोलने से कन्नी काट रहे हैं।
वन विभाग में 1992 में माली के पद पर 11 कर्मचारियों की नियुक्ति गलत तरीके से की गई थी। इसमें कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। विभाग के सात कर्मचारियों के खिलाफ जांच चल रही है। एक कर्मचारी रामसकल के खिलाफ चार्जशीट चल रही है। इसकी जांच डीएफओ बलिया कर रहे हैं। वहीं रिटायर हो चुके छह कर्मचारियों का पेंशन रोक दिया गया है। - गंगा दत्ता मिश्रा, डीएफओ आजमगढ़।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें