कस्बा सरायमीर में दो मुहर्रम का जुलूस बुधवार सुबह आठ बजे मजलिस के बाद जुलजुनाह, अलम के साथ सिरादी पुरा इमामबाड़ा अजाखाना जहरा से निकला गया। जुलूस यहां से रौजा अली आशकान पहुंचा। यहां मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना शारिब अब्बास ने कहा कि हजरत मोहम्मद (स) और उनकी संतान की जिंदगी हमारे लिए एक नमूना हैं। जिन्होंने हमें ये पैगाम दिया है कि न जुल्म करो और न जुल्म सहो। रसूल इस्लाम ने कभी भी किसी भी व्यक्ति पर जुल्म और अत्याचार नहीं किया। मदीना में हर धर्म के लोग रहते थे। उसके बाद अली आशकान से जुलूस पुराना थाना होते हुए चौक स्थित इमामबाड़ा जैनब पहुंचकर समाप्त हुआ। समापन से पूर्व लखनऊ से आए सय्यद जीशान अली ने इमाम हुसैन की अजमत और उन पर होने वाला जुल्म बयां किया तो मजलिस में मौजूद लोगों की आंखों में आंसू छलक पड़े। जुलूस में दूरदराज से कई अन्जुमन आईं। जुलूस का संचालन जीशान ने किया। शिया कमेटी के अध्यक्ष कायम रजा और मोहम्मद ने आए हुए लोगों का आभार व्यक्त किया।