मेंहनगर। ऐतिहासिक कस्बे मेंहनगर में बना बस अड्डा जानवरों का आशियाना और डग्गामार वाहनों का स्टैंड बना हुआ है। यहां तैनात कर्मचारी बस अड्डे में ताला लगाकर गायब रहते हैं। जिसके कारण मेंहनगर तहसील क्षेत्र के लोग सरकारी बस सेवा का लाभ पाने से वंचित हैं।
किसी क्षेत्र, प्रदेश, राष्ट्र के विकास के लिए चार बुनियादी सुविधाएं मूलरूप से आवश्यक होती हैं। इसके लिए सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और पानी की भूमिका अहम होती है। क्षेत्र में विकास की अहम कड़ी होता है। 1968 में क्षेत्रीय विधायक के रूप में जनसंघ द्वारा समर्थित जैनूराम दीपक और बाती चुनाव निशान से विजई हुई थी। उनके प्रयासों से 1968 में ही मेंहनगर की जनता को यातायात व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए कस्बे में बस अड्डे की स्थापना हुई थी। तब से लेकर 2000 तक इस बस अड्डे से छह जोड़ी परिवहन निगम की बसें संचालित होती थी, जो प्रदेश की राजधानी लखनऊ और कानपुर, दिल्ली से कस्बे को जोड़ती थी। स्थानीय स्तर पर आजमगढ़, गाजीपुर, जौनपुर और वाराणसी तक मुसाफिरों को गंतव्य तक पहुंचाया करती थीं। फिर प्रदेश में सपा, बसपा की सरकार बनी और इस बस अड्डे के दुर्दिन शुरू हो गए। लोगों को गंतव्य तक पहुंचने के लिए निजी डग्गामार वाहनों के भरोसे छोड़ दिया गया। 2016 में सपा सरकार के उत्तरार्ध में इस बस अड्डा के दिन बहुरे और सपा सरकार ने नवीनीकरण के लिए 87 लाख रुपये बजट पास किया और स्थानीय प्रतिनिधियों द्वारा विधि-विधान से पूजा करने के बाद निर्माण शुरू कराया गया। लेकिन 2017 में सत्ता परिवर्तन होते ही एकबार पुन: निर्माण बंद हो गया। स्थानीय लोगों के प्रयास से भाजपा सरकार द्वारा इसे सन 2020 में पूरा कराया गया। अक्टूबर 2022 में मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ द्वारा जिले की योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया गया, जिसमें रोडवेज मेंहनगर शामिल था। निर्माण निगम द्वारा हैंडओवर होने के बावजूद भी आज तक इस बस अड्डे से कोई भी परिवहन विभाग की बसें संचालित नहीं हुई। जिसके कारण यहां से निकलने वाले यात्री, व्यापारी आज भी निजी डग्गामार वाहनों का सहारा लेकर जिला मुख्यालय और गंतव्य तक जाने को हैं।