बलरामपुर। मौसम में बदलाव के कारण फंगल इंफेक्शन से कान के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। मंडलीय अस्पताल के ईएनटी विभाग में रोज 60 से 70 लोग इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों ने कहा कि कान को लेकर बरसात में सतर्क रहने की जरूरत है। लापरवाही से दिक्कत बढ़ सकती है। डॉक्टर दवा के साथ सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। बारिश में विभिन्न तरह के संक्रमण बढ़ जाते हैं। लापरवाही और साफ-सफाई का ध्यान न रखने से लोग कान की बीमारी की चपेट में तेजी से आ रहे हैं। कान में दर्द, खुजली और बहने की परेशानी आ रही है। मंडलीय अस्पताल में प्रतिदिन की ओपीडी 800 से 900 मरीजों की होती है। अस्पताल में ईएनटी चिकित्सक डॉ. आशुतोष पटेल की ओपीडी में रोज 60 से 70 मरीज आ रहे हैं। इनमें से वर्तमान में 12 से 13 मरीज फंगस और कान की बीमारी से पीड़ित होकर पहुंच रहे हैं।
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संक्रमण के लक्षण
- कान में दर्द
- कान में खुजली होना
- कान बंद हो जाना
- कान बहना
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ये बरतें सावधानी
- नहाते समय कान में गंदा पानी जाने से रोंके
- स्वीमिंग पूल में नहाने से पहले इयर प्लग लगाएं
- तालाब, पोखरे में नहाने से बचें
- कान में तेल न डालें
- खुद से कान की सफाई न करें
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बारिश के बाद उमस भरी गर्मी में फंगस का इंफेक्शन तेजी से बढ़ता है। इसके चलते कान में ओटोमाइक्रोसिस लग जाता है। कान में दर्द, सुनाई कम देना, खुजली की दिक्कत होती है। कान में पानी जाने से परेशानी होती है। कान का पर्दा फटा है तो उसका उचित इलाज कराएं। कान में ज्यादा फंगस लगने से कान के पर्दे के खराब होने की आशंका रहती है। डॉक्टर को दिखाने के बाद ही कान साफ कराना चाहिए। कान की बीमारी को लेकर सतर्क रहें। कोई परेशानी हो तो लापरवाही न करें, डॉक्टर से संपर्क कर इलाज कराएं।
डॉ. आशुतोष पटेल, ईएनटी विशेषज्ञ, मंडलीय अस्पताल।