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अब प्रदूषण प्रमाणपत्र की ‘चाबी’ से ही खुलेगा वाहनों का ‘लाक’

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आजमगढ़। जिले में वाहनों के पहिये तभी घूमेंगे जब वाहन स्वामियों के पास प्रदूषण प्रमाणपत्र की ‘चाबी’ होगी। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से सभी वाहन का प्रदूषण प्रमाणपत्र बनवाना अनिवार्य किया गया है। वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए ये कदम उठाया गया है। संभागीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) की ओर से मंडलभर में निर्देश जारी करते हुए व्यवस्था लागू कर दी गई है। अब बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र के न तो बीमा होगा और न ही आरटीओ में वाहन संबंधी कोई अन्य कार्य होंगे। अब इसे अनिवार्य कर दिया गया है। आरटीओ में वाहन के रजिस्ट्रेशन, फिटनेस, रोड टैक्स, वाहन निरीक्षण, व्हीकल ट्रांसफर, समेत किसी भी तरह के काम कराने से पहले वाहन स्वामी को प्रदूषण प्रमाणपत्र दिखाना अनिवार्य है। अभी जिले की स्थिति ये है कि यहां करीब 60 प्रतिशत वाहन बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र के ही सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या ग्रामीण क्षेत्र में चलने वाले वाहनों की है। इन पर शिकंजा कसने की तैयारी की जा रही है। विभाग ने बीमा कंपनियों व उनके एजेंटों को निर्देश जारी किए हैं कि वाहनों के प्रदूषण प्रमाणपत्र होने पर ही वाहनों का बीमा किया जाए। नए मोटर व्हीकल एक्ट में ट्रैफिक नियम तोड़ने पर जुर्माना राशि को पांच से 10 गुना तक बढ़ा दिया गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का प्रमाणपत्र न होने पर 10 हजार रुपये तक जुर्माना चुकाना पड़ सकता है। एआरटीओ प्रशासन सतेंद्र कुमार यादव ने बताया इस व्यवस्था को जिले में लागू कर दिया गया है। बिना इसके वाहन संबंधी कोई कार्य नहीं होगा। बीमा कंपनियों को भी निर्देशित कर दिया है। नियम तोड़ने वालों पर शिकंजा कसा जाएगा।
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