जिसे दीना कहकर नेता जी ने संबोधित किया था वह आजमगढ़ जनपद के सदर तहसील के परमेश्वरपुर गांव के रहने वाले थे। वो कभी मुलायम सिंह यादव के साथ देवरिया जेल में बंद थे। बताते चलें कि तत्कालीन भाजपा सरकार में चीनी मिल प्रशासन की मनमानी से तंग आकर क्षेत्र के किसानों ने अगस्त 1992 में किसान नेता राधेश्याम सिंह की अगुवाई में चीनी मिल गेट पर आंदोलन शुरू किया। इस आंदोलन में धीरे-धीरे अगल-बगल के गांवों से लोग जुटने लगे।
आजमगढ़ में मुलायम सिंह यादव
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आठ सितंबर को चीनी मिल प्रशासन और आंदोलन कर रहे किसानों के बीच वार्ता विफल हुई तो आंदोलन और उग्र हो गया। आंदोलन की धमक लखनऊ तक पहुंची तो तत्कालीन जनपद देवरिया के जिलाधिकारी पर किसानों को मनाने का दबाव बढ़ने लगा। नौ सितंबर को प्रशासनिक अधिकारियों व चीनी मिल प्रशासन के साथ राधेश्याम सिंह से वार्ता शुरू हुई जो देर शाम तक चली।
वार्ता विफल होने के बाद आंदोलनकारियों ने चीनी मिल प्रबंधक को बंधक बनाकर आंदोलन स्थल पर बैठा लिया। उन्होंने शर्त रखी कि जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं होगी, प्रबंधक हमारे साथ बैठे रहेंगे। रामकोला कस्बा में 10 हजार से अधिक किसान जुट गए। राधेश्याम पर प्रशासन आंदोलन खत्म करने का दबाव बनाने लगा। इसकी जानकारी किसानों को हुई तो वह उग्र हो गए और पुलिस पर पथराव कर दिया। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने फायरिंग की और 10 सितंबर को दो किसानों की मौत हो गई।
राधेश्याम सहित करीब 250 किसानों को गिरफ्तार कर देवरिया जेल में डाल कस्बे में कर्फ्यू लगा दिया गया। जब मुलायम सिंह यादव पहुंचे तो उन्हें भी गिरफ्तार कर देवरिया जेल में बंद कर दिया गया। यहीं पर उनकी मुलाकात दीना यादव से हुई थी। इसके बाद वह दीना को कभी नहीं भूले। देवरिया जेल से मुलायम सिंह यादव को बनारस सेंट्रल जेल शिफ्ट किया गया था।