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Azamgarh News: चांद दिखा, इस्लामिक साल का पहला महीना मुहर्रम शुरू

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चांद का दीदार होने के साथ ही इस्लामिक कैलेंडर का नया साल से शुरू हो गया। ऐसे में मुहर्रम के मद्देनजर शिया आबादी वाले इलाकों में अज़ाखाने सज गए हैं। वहीं इमामबाड़ों की साफ-सफाई और रंग रोगन का काम पूरा हो गया है। इमामबाड़े अजादारों से गुलजार हो गए हैं। मजलिसे शुरू हो गई हैं और या हुसैन की दर्द भरी सदाएं गूंजने लगी हैं। मुहर्रम का चांद दिखते ही शिया मुसलमानों ने काले लिबास पहन लिए। महिलाओं ने भी शृंगार के सामान रख दिए। घरों पर गम के प्रतीक काले झंडे लगा दिए गए। मजलिसों और जुलूसों का क्रम दो माह आठ दिन तक चलेगा। इस दौरान इमामबाड़ों, अजाखानों में मजलिसों का दौर लगातार जारी रहेगा। मौलाना फरहत हुसैन ने बताया कि मोहर्रम का चांद बुधवार को दिख गया। इसके साथ ही इस्लामिक वर्ष का पहला महीना मुहर्रम बृहस्पतिवार से शुरू होगा। उन्होंने बताया कि पैगंबर हज़रत मुहम्मद के नवासे हज़रत इमाम हुसैन अहिंसा के देवता थे। उन्होंने अमन और मुहब्बत का पैगाम देने वाले इस्लाम के लिए एक ज़ालिम बादशाह के आगे अपना सिर झुकाने के बजाय तीन दिनों तक भूखे और प्यासे रहकर अपने परिवार और 72 लोगों के साथ शहादत दे दी। लेकिन अपना सिर झुकाना गवारा नहीं किया। शिया समुदाय के लोग अज़ाखाने सज़ा देते हैं। नौ मुहर्रम तक दिन रात मजलिसें होती हैं। दस मुहर्रम को ताजिया दफन किया जाता है। इसके बाद रबीअव्वल की आठ तारीख तक जुलुसों और अमारियां निकालने का क्रम चलता है। बुधवार को मुहर्रम का चांद दिखते ही फूलपुर और उसके आस पास के इमाम बारगाह में मजलिसें शुरू की गईं।
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