नया सत्र शुरू हुए 39 दिन बीत गए हैं, लेकिन बच्चों के माता-पिता के खातों में अभी तक ड्रेस, जूते-मोजे और बैग के 1200 रुपये अभी तक नहीं पहुंचे हैं। यह पैसा सत्र शुरू होने से पहले या सत्र के शुरुआती दिन में भेजने का प्रावधान है, ताकि बच्चे पहले दिन से नए ड्रेस, जूते-मोजे में नए बैग के साथ आ सकें। यह रकम जिले में कक्षा एक से आठ तक के सवा चार लाख छात्र-छात्राओं के अभिभावकों को दी जानी थी। जिले में 2702 परिषदीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं। जिसमें 1720 प्राथमिक, 528 उच्च प्राथमिक और 454 कंपोजिट विद्यालय शामिल है। उक्त विद्यालयों में करीब सवा चार लाख बच्चे पंजीकृत हैं। प्रदेश सरकार की ओर से उक्त स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को हर साल दो जोड़ी यूनीफॉर्म, जूते, मोजे, बैग निशुल्क रूप में दिया जाता था। लेकिन पिछले दो साल से प्रदेश सरकार ने नियम में बदलाव कर दिया। अभिभावकों के खातों में यह धनराशि सीधे पहुंचेगी। लेकिन एक अप्रैल से सत्र शुरू हुआ और मई के भी आठ दिन बीत गए और रकम अभी तक छात्र-छात्राओं के माता-पिता के खाते में नहीं पहुंच सकी है। शिक्षकों की मानें तो सत्र शुरू होते ही जब बच्चे नए ड्रेस, जूते-मोजे व बैग लेकर स्कूल आते हैं तो उनके मन में उत्साह रहता है। समय से पैसे नहीं भेजे जाने से इसका असर सत्र के शुरुआती दिनों से ही दिख रहा है। स्कूल ड्रेस नहीं होने से काफी बच्चे स्कूल आने में आनाकानी करते हैं।