रोडवेज के ड्राइवरों और कंडक्टरों को अपना मोबाइल चेक करवाना होगा। उन पर आरोप है कि रूट पर चेकिंग के दौरान जांच दल की सूचना दूसरे ड्राइवरों व कंडक्टरों को दी जाती है। जिससे जांच प्रभावित होती है। साथ ही भ्रष्टाचार बढ़ता है। वहीं कंडक्टरों व ड्राइवरों ने इसे निजता के हनन का मामला मानते हुए नाराजगी जताई है और आदेश को वापस लेने की मांग की है। रोडवेज की अपर प्रबंध निदेशक अन्नपूर्णा गर्ग ने 20 जून को आदेश जारी किया है। जिसमें यह कहा गया कि कुछ ड्राइवर व कंडक्टरों ने व्हाट्सएप ग्रुप बनाए हैं, जिस पर प्रवर्तन दल की रूट चेकिंग की जानकारी दूसरे साथियों को दी जाती है, जिससे भ्रष्ट कर्मचारी जांच में फंसने से बच जाते हैं। इस पर रोक लगाने के लिए अब ड्राइवरों व कंडक्टरों को अपना फोन अनलॉक करना होगा। प्रवर्तन दल के अधिकारी मोबाइल में ऐसी गतिविधि पाते हैं तो उसकी सूचना मुख्यालय को भेजेंगे। सहयोग नहीं करने वालों पर कार्रवाई होगी। रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के मंत्री पीएन सिंह ने कहा कि ने कहाकि भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वालों पर कड़ाई हो, लेकिन इस तरह के आदेश से निजता भंग होती है। यह किसी भी तरह से ठीक नहीं है। इससे ड्राइवरों व कंडक्टरों के शोषण के मामले बढ़ेंगे। जहां तक रही बात ग्रुप में सूचना देने की तो वह काम तो जिम्मेदार अधिकारी स्वयं सूचना पहले ही दे देते हैं कि वह किस रूट पर चेक करने वाले है। ऐसे में चालक परिचालक क्यों दोषी होंगे। एआरएम अवधेश कुमार पाल ने बताया कि प्रवर्तन दल द्वारा की जा रही जांच की सूचना व्हाट्सएप के माध्यम से इधर-उधर करने की बात सामने आई है। जिसे लेकर अपर प्रबंधक निदेशक ने चालकों व परिचालकों की मोबाइल चेक करने के लिए निर्देश जारी किया गया है। जिसका पालन कराया जाएगा।