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जिला जेल में अब भी चल रही मोबाइल, वीडियो वायरल

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आजमगढ़। जिला जेल की व्यवस्था हमेशा से ही विवादों में रही है। अब एक बार फिर वायरल हुए वीडियो ने जेल प्रशासन की परेशानी को बढ़ा दिया है। वायरल वीडियो में एक बंदी जेल में मोबाइल पर बात करता नजर आ रहा है। मामला गरमाने के बाद जेल प्रशासन इसे पहले का वीडियो बता रहा। एएसपी सिटी शैलेंद्र लाल ने कहा कि मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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जिला जेल में जब भी औचक निरीक्षण हुआ है तब आपत्ति जनक वस्तुएं बरामद की गई हैं। अभी हाल ही में डीएम-एसपी ने जिला कारागार का औचक निरीक्षण किया था, इस दौरान भारी मात्रा में मोबाइल के साथ गांजा की पुड़िया मिली थी। मामले में सख्त कार्रवाई की गई। शासन स्तर से वरिष्ठ जेल अधीक्षक, जेलर, डिप्टी जेलर व कई बंदी रक्षकों पर गाज गिर गई। 12 से ज्यादा बंदियों के खिलाफ सिधारी थाने में मुकदमा भी पंजीकृत कराया गया।
इतनी बड़ी कार्रवाई के बाद भी हालाता में सुधार नहीं आया। बुधवार को एक बार फिर जिला जेल सुर्खियों में आ गया। वायरल हुए वीडियो में एक बंदी आराम से बिस्तर पर लेट कर मोबाइल से बात करते देखा जा रहा। प्रतिबंधित होने के बावजूद जेल में मोबाइल पहुंचा कैसे इसको लेकर जेल प्रशासन कुछ नहीं बता रहा।
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वायरल वीडियो में जो बंदी मोबाइल पर बात करता नजर आ रहा है वह राजीव सिंह है, जिसे जेल प्रशासन ने कुछ दिनों पूर्व ही मेरठ जेल भेज दिया। वहीं, वीडियो में नजर आने वाले एक बंदी राणा प्रताप को भी अब अन्यत्र भेजने की योजना जेल प्रशासन ने बना ली है। जेल सूत्रों की मानें तो बीते 28 अगस्त को आजमगढ़ जेल से अन्यत्र भेजे गए बंदी सल्लू यादव द्वारा यह वीडियो बनाया गया है। जिसे उसी ने किसी के माध्यम से वायरल कराया है।
वीडियो वायरल होते ही जेल महकमे में हड़कंप: जेल प्रशासन वीडियो वायरल होते ही सकते में आ गया है। जेलर विकास कटियार ने वायरल वीडियो को जेल का ही होना बताया है। लेकिन उनका कहना है कि यह वीडियो काफी पुराना है। बंदी सल्लू यादव ने यह वीडियो बनाया है और दूसरी जेल भेजे जाने के बाद उसने ही किसी के माध्यम से इसे वायरल कराया है। वीडियो में जो बंदी बात कर रहा है उसका नाम राजीव सिंह है, जिसे मेरठ जेल भेजा जा चुका है। वहीं वीडियो में दूसरे बंदी राणा प्रताप को अन्यत्र जेल भेजने की तैयारी है।
इस बाबत एएसपी सिटी शैलेंद्र लाल वायरल वीडियो की जांच कराई जाएगी, यदि वह आजमगढ़ जेल का है तो निश्चित तौर पर मुकदमा पंजीकृत कर कार्रवाई की जाएगी। जेल में मोबाइल का प्रयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित है। इसके बाद भी बंदियों तक मोबाइल कैसे पहुंच रहा है, इसकी भी जांच होगी। जेल प्रशासन के संलिप्त होने की भी जांच कराई जाएगी।
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