निजामाबाद क्षेत्र के सोफीपुर गांव निवासी डॉ. गिरिजेश यादव के पुत्र अवनीश यादव एमबीबीएस के छात्र हैं। वर्तमान में चंडीगढ़ में रहकर ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें केंद्र सरकार से बहुत सारी उम्मीदें थीं लेकिन कोर्ट में दायर हलफनामे के बाद उन्हें अपना भविष्य अधर में लटकता दिख रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द उनके लिए भी कोई रास्ता निकाला जाए। उन्होंने कहा कि उनके साथ के कुछ छात्र यूक्रेन गए हैं। यदि सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं निकाला तो वह भी अगले महीने यूक्रेन जाएंगे।
यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहीं सगड़ी तहसील क्षेत्र के खतीबपुर गांव निवासी रेनू यादव का कहना है कि लाखों रुपये खर्च कर विदेश गईं । रेनू यादव के भाई डॉ. सत्यशील यादव ने बताया अब स्थिति सामान्य हो रही है। बॉर्डर पर ही तनाव है। 23 तारीख को रेनू को यूक्रेन जाने के लिए टिकट निकाला गया है। रेनू यादव ने बताया वह चार वर्ष की पढ़ाई कर चुकी हैं। दो वर्ष की पढ़ाई बाकी है। यूक्रेन के हालात ठीक हो रहे हैं, शेष पढ़ाई पूरा करने के लिए यूक्रेन ही जाएंगी।
सरायमीर के पवई लाडपुर गांव निवासी श्रेया यादव पुत्री डॉ. नरेंद्र यादव यूक्रेन में रहकर मेडिकल की पढ़ाई कर रही थीं। श्रेया का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा यूक्रेन में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों को देश के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश न देकर अपने हाल पर छोड़ दिया है। उन्हें उम्मीद थी कि संकट की इस घड़ी में भारत सरकार मदद करेगी। अब सरकार से उम्मीद टूट गई है। हम अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए फिर से यूक्रेन जाएंगे। बताया कि उनके साथ के भारतीय छात्र भी जाने की तैयारी कर रहे हैं।
पढ़ें: घूस लेते बरेका का इंजीनियर गिरफ्तार, जांच में खुल रही भ्रष्टाचार की परतें