आजमगढ़। मंडल के तीनों जनपदों में बने होटल भू-जल जल के साथ ही हवा की भी सेहत बिगाड़ रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आजमगढ़, मऊ व बलिया के 55 होटलों को नोटिस भेजा है। लेकिन किसी ने अभी तक न तो नोटिस का जवाब दिया है और न ही विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) ही लिया है। विभाग इनके खिलाफ अब कार्रवाई की तैयारी में जुटा है।
राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के निर्देश पर शासन स्तर से गठित कमेटी की जांच में विभिन्न होटलों में भूमिगत जल के इस्तेमाल और बिजली कटने पर चलाए जाने वाले जनरेटर के मानकों में कई तरह की गड़बड़ियां मिली हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आजमगढ़ में 22, मऊ में 12 व बलिया जनपद में 21 होटलों को अक्तूबर माह में ही अपने यहां सभी व्यवस्थाओं को दुरुस्त कर अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने के लिए नोटिस जारी किया था। इसके अलावा भूगर्भ जल विभाग ने भी मंडल के तीनों जनपदों के होटलों को भूगर्भ जल दोहन के मामले में नोटिस जारी किया है। नोटिस जारी होने के बाद भी किसी होटल संचालक ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व भूगर्भ जल विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लिया।
गौरतलब हो कि होटल के संचालन के लिए विभिन्न विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना जरूरी होता है। इसमें भूमिगत जल के इस्तेमाल के लिए भूगर्भ जल विभाग और जनरेटर के इस्तेमाल के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होता है। हवा को प्रदूषण से बचाने के लिए सभी होटलों को डीजी सेट लगाना जरूरी होता है। हाल यह है कि जो होटल, लॉज डीजी सेट लगाए हैं या जो नहीं लगाए हैं किसी ने भी दोनों विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लिया है।
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मंडल के सभी होटलों को फिर से नोटिस जारी कर अपने यहां व्यवस्था को सही करते हुए अनापत्ति प्रमाण पत्र लिए जाने का समय दिया जाएगा। इसके बाद भी अगर कोई होटल संचालक अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लेता है तो उसके खिलाफ जल एवं वायु अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ सुरेशचंद शुक्ला, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।