फूलपुर और ग्रामीण इलाकों में मुहर्रम के दूसरे दिन शुक्रवार को भी कई जगहों पर मजलिसों के आयोजन हुए। जाकिरों ने जहां शहीदाने कर्बला पर रोशनी डाली तो वहीं अंजुमनों ने नौहा मातम कर शहीदों को खिराजे अकीदत पेश की। इस दौरान या हुसैन की सदाएं बुलंद होती रहीं। मेजवां : मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना वसी मोहम्मद खां ने कहा कि इल्म हासिल करना और दूसरों तक पहुंचाना, यतीमों और मजलूमों की मदद करना ही इस्लाम का नाम है। इस्लाम जुल्म के खिलाफ डटकर खड़े होने की सीख देता है। सिर्फ हुसैनियत ज़िंदा बाद का नारा लगा देना काफी नही होता बल्कि हमारे अंदर हुसैन जैसा किरदार होना चाहिये। फरशे अज़ा हमें बहुत कुछ सीख देती है। यहां दीनी और दुनियावी दोनों बातें होती है। मौलाना ने जब इमाम हुसैन के मसाएब पेश किए तो अजादार रोने लगे। अंजुमन अब्बासिया ने नौहा मातम पेश किया उधर, दसमड़ा गांव में मौलाना हुसैन हैदर ने मजलिस के दौरान कहा कि इमाम हुसैन और उनके साथियों ने अपनी कुर्बानी और सब्र के जरिए जालिम हुकूमत का सामना किया और उसे समाप्त कर अमन का परचम लहराया। हज़रत इमाम हुसैन की याद इंसानियत और आदमियत और शराफत की दलील है। इस दौरान अंजुमन गुलज़ारे पंजतन ने नौहा मातम किया। शायरों ने मौला की बारगाह में नजराने अकीदत पेश की।