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उद्योग लगाने के नाम पर लिए गए भूखंडों पर लटक रहे ताले

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आजमगढ़। जनपद में रोजगार को बढ़ावा देने के लिए सर्फुद्दीनपुर में इंडस्ट्रीयल क्षेत्र विकसित किया गया। इस क्षेत्र में लोगों को नाममात्र की रकम पर सेड और भूखंड आवंटित किए गए। लेकिन आज ज्यादातर भूखंडों में ताला लटका रहता है। जिसके कारण जिस उद्देश्य से इस क्षेत्र को बसाया गया वह अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पा रही है। लगभग आठ से 10 माह पहले डीएम ने इसकी जांच कर काम न करने वाले आवंटियों को बाहर करने का निर्देश दिया गया था। लेकिन यह जांच कहां तक पहुंची यह कोई नहीं जानता। इंडस्ट्रीयल स्टेट में शासन के निर्देश पर 11 सेड और 19 भूखंड विकसित किए गए। इन भूखंडों को इंडस्ट्री लगाने के लिए लोगों को आवंटित किया गया। एक समय था जब यहां पर लोग ट्रांसफार्मर बनाने और उनकी मरम्मत का कार्य करते थे। जिसके कारण सैकड़ों लोग रोजगार से जुड़े थे। ग्रामीण इलाकों से भी लोग यहां काम करने के लिए आते थे। लेकिन समय बीतने के साथ इस इंडस्ट्रीयल स्टेट की चमक फीकी पड़ी और इंडस्ट्री बंद होने लगी। तत्कालीन उपायुक्त स्वत: रोजगार ने जब इसकी जांच की तो पाया कि पांच भूखंडों में ताला लटक रहा है। जबकि तीन आवंटियों की मृत्यु हो चुकी थी। लेकिन इसके बाद उनके भूखंड की वरासत उनके आश्रितों के नाम नहीं हो सकी थी। वहीं कुछ लोग उक्त भूखंड में आवास का निर्माण कराकर रहते हुए भी पाए गए। उपायुक्त स्वत: रोजगार ने इसकी रिपोर्ट डीएम को सौंपी। डीएम ने इस पर सीडीओ आनंद कुुमार शुक्ला को जांच कर कार्रवाई का निर्देश दिया। इस बात को लगभग आठ से 10 महीने हो गए लेकिन जांच में क्या मिला यह कोई नहीं जानता। इस मामले में निवर्तमान उपायुक्त उद्योग प्रवीण मौर्य ने बताया कि सीडीओ के निर्देश पर हमने पूरे क्षेत्र की जांच कर रिपोर्ट तैयार कर सौंप दी थी। आगे क्या हुआ इस संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं। मेरा भी गाजीपुर तबादला हो गया है। इसलिए मैं कुछ नहीं कह सकता। वहीं सीडीओ आनंद कुमार शुक्ला ने कहा कि उन्होंने उपायुक्त उद्योग से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी थी। लेकिन इसके बाद क्या हुआ मुझे जानकारी नहीं। लेकिन मैं इस संबंध में जानकारी करता हूं।
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