वर्ष 2002 में महरागंज थाना के करमहा डिंगूरपुर गांव में हुए दोहरे हत्याकांड के मामले में अदालत ने बृहस्पतिवार को सुनवाई पूरी करते हुए पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही सभी पर 31-31 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। इसी मामले में चार आरोपियों की मुकदमा कार्रवाई के दौरान मौत हो चुकी है। एक के नाबालिग होने के चलते उसकी पत्रावली अलग कर दी गई। फैसला अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट रमेश चंद्र द्वितीय की अदालत में सुनाया गया। अभियोजन के अनुसार, महराजगंज थाना क्षेत्र के करमहा डिंगूरपुर गांव में 13 अगस्त 2002 को नागपंचमी के दिन प्रधान रामजीत उर्फ जित्तन व चार वर्षीया बालिका मनीषा की गोली लगने से मौत हो गई थी। प्रधान की पत्नी कैलाशी देवी ने थाने में गांव के 11 के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप लगाया था कि घटना के दिन लगभग साढ़े 11 बजे गांव के लोग कबड्डी खेल रहे थे। तभी पुरानी रंजिश को लेकर गांव के रमाकांत सिंह, अशोक सिंह, संत विजय सिंह, सुनील सिंह तथा पांच छह अन्य व्यक्ति असलहे लेकर घर पर आए फायरिंग की। जिसमें प्रधान रामजीत समेत कई लोग घायल हो गए। इलाज के दौरान प्रधान रामजीत व मनीषा की मौत हो गई। मामले में पुलिस ने 11 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। मुकदमें के परीक्षण के दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ से पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता विक्रम सिंह पटेल व प्राइवेट कौंसिल श्रीप्रकाश राय ने वादी कैलाशी समेत 23 गवाह पेश किए। अभियोजन और बचाव पक्ष के तर्को को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 21 साल बाद रमाकांत सिंह, संत विजय सिंह, सुनील सिंह, यशवंत सिंह व दिनेश सिंह को हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास व 31-31 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।