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बीते चार माह, बिना किताबों के पढ़ाई कर रहे परिषदीय स्कूलों के बच्चे

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आजमगढ़। जिले में प्राथमिक व जूनियर स्कूलों में पढ़ रहे करीब दो लाख बच्चों को अभी तक किताबें नहीं मिली हैं। 16 जून को स्कूल खुले थे। एक माह से अधिक हो गया है लेकिन अभी तक किताबें स्कूलों में नहीं पहुंची हैं। कुछ बच्चे ही पुरानी किताबों से पढ़ाई कर रहे हैं। करीब 30 से 50 फीसदी बच्चों के पास किताबें नहीं हैं। जिनके पास हैं भी वह फटी हैं या फिर आधी अधूरी। पुस्तकें न होने से शिक्षकों को भी पढ़ाने में बड़ी समस्या हो रही है।
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जिले में 2702 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें 1720 प्राथमिक, 528 उच्च प्राथमिक एवं 454 कंपोजिट विद्यालय हैं। इसके अलावा 21 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के लगभग सवा चार लाख बच्चों को निशुल्क पाठ्य पुस्तकें दी जानी है। जिले में कुल 28 लाख 85 हजार 976 पुस्तकें जिले को उपलब्ध कराई जानी है। नए शिक्षा सत्र की शुरुआत अप्रैल महीने में हो गई थी। उस दौरान करीब डेढ़ महीने स्कूल खुले रहे और बच्चों ने बिना नई किताब के पुरानी पुस्तकों से ही पढ़ाई की। इसके बाद गरमी की छुट्टियां हो गई। गरमी की छुट्टियों के बाद बीते सोलह जून को विद्यालय खुल गए। स्कूल खुले सवा महीने का समय बीत गया है लेकिन अभी तक जिले को पूरी पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो सकी है। जबकि विभाग के निर्देश के क्रम में नई किताबों की आपूर्ति के लिए क्रयादेश संबंधित प्रकाशकों को बीते जून माह के मध्य में ही जारी किया जा चुका है। हालांकि अब पुस्तकें मिलना शुरू हो गई है। हाल ही में कक्षा-तीन एक लाख 96 हजार 181, दूसरी खेप में 90 हजार 420 पुस्तकें आईं। वहीं तीसरी खेप में करीब 45 हजार पुस्तकें आईं। विभाग की ओर से भले ही इस माह में किताबें मिल जाने का दावा किया जा रहा है लेकिन बीते वर्ष की तरह इस बार भी बच्चों को किताबें देर से ही मिलने की संभावना नजर आ रही है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अतुल कुमार सिंह ने बताया कि पुस्तकें जिले को मिलनी शुरू हो गई है। आगामी दिनों में और पुस्तकें उपलब्ध हो जाएगी। इनका सत्यापन कराने के बाद जल्द से जल्द बच्चों में इनका वितरण करा दिया जाएगा।
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